आप ने antarvasna sex stories के पिछले भाग में पढ़ा कभी मेरे दाने को काट लेते और मैं कराहती हुयी मजे लेती रही मैं अब उनसे विनती करने लगी आह्ह बस करो और शुरू करो ना मुझे घर भी जाना है अब आप antarvasna sex stories में आगे पढ़े
Antarvasna Sex Stories 4
मुझे लगा कि उन्होंने मेरी बात सुन ली और मान गये उन्होंने मेरी तरफ सर उठा कर देखा और कहा चुदने के लिये तैयार हो?
मैंने भी उनके ही भाषा में कहा- अब तड़पाओ नहीं यार चोद भी दो
फिर दोबारा उन्होंने मेरी चूत को चूमा और जुबान जैसे ही मेरे छेद पर लगाई मेरा फोन बजने लगा फोन की आवाज सुनते ही मेरा तो जोश ही ठंडा हो गया फोन बगल में ही टेबल पर था और यह मेरी बड़ी जेठानी का था
मैंने उंगली मुंह पर रख कर उन्हें चुप रहने का इशारा किया और फोन उठा लिया जेठानी ने फोन उठाते ही कहा कब तक आओगी?
मैंने उत्तर दिया- बस एक डेढ़ घंटे में पहुंच जाऊँगी
तब उन्होंने कहा- मार्किट से थोड़ा मीठा और पनीर साथ ले आना
मैंने हां बोल कर फोन काट दिया और बोली अब मुझे जाना होगा वरना घर में लोग तरह तरह के सवाल करेंगे
पर उन्होंने मेरी चूत को चूमते हुये कहा- अभी तो मजा आना बाकी है बस थोड़ी देर और रुक जाओ
मैं तो अभी भी उसी अवस्था में थी मेरी एक टांग उनके कंधे पर और उनका मुंह मेरी चूत पर मैं ना ना करती रही फिर बोली जल्दी करो
वो भी मान गये पर इससे पहले कि वो खड़े होते मेरा फोन फिर बजना शुरू हो गया इस बार तारा थी मैंने तुरंत फोन उठा लिया
उधर से आवाज आयी- हो गया या और समय लगेगा?
मैंने कहा- बस थोड़ी देर और
उसने पूछा- अभी तक किया नहीं क्या कुछ भी?
मैंने जवाब दिया- बस थोड़ी देर और
उसने कहा- ठीक है मजे ले लो मैं और इंतज़ार कर लूंगी और फोन काट दिया
मेरे फोन रखते ही वो खड़े हो गये और मेरी एक टांग उठा कर कुर्सी पर रखते हुये बोले तारा थी क्या?
मैंने कहा- हां
उन्होंने कहा- उसे शक तो नहीं हुआ होगा?
मैंने कहा- शायद हो सकता है अब जल्दी करो या मुझे जाने दो
इतना कहते ही मुस्कुराते हुये उन्होंने मुझे चूम लिया और लंड को हाथ से पकड़ हिलाते हुये मेरी चूत के छेद के पास ले आये
मैंने भी अपनी कमर आगे कर दी और टांगें फैला दी फिर उन्होंने हाथ पे थूक लिया और सुपारे के ऊपर मल दिया और मेरी चूत की छेद पर टिका के दबा दिया
मेरी चूत का छेद तो पहले से खुली थी और गीली भी थी हल्के से दबाव से ही लंड मेरी चूत में सरकता हुआ घुस गया मुझे अजीब सी गुदगुदाहट के साथ एक सुख की अनुभूति हुयी और मैंने अपनी आंखें बंद कर उन्हें कस के पकड़ते हुये चूत को उनके लंड पे दबाने लगी
मैं पूरे जोश में आ गयी थी और अपनी कमर किसी मस्ताई हुयी हथिनी के समान हिलाने लगी
ये देख उन्होंने धक्के देने शुरू कर दिए उन्हें भी शायद समझ आ गया था मेरी इस तरह की हरकत और मेरी गीली चूत में छप छप आवाज से कि मैं बहुत गर्म हो चुकी हूं
उन्होंने धक्के लगाते हुये मुझसे पूछा- मजा आ रहा है?
मैं भी तो मस्ती में थी कमर उचकाते हुये बोल पड़ी- बस कुछ मत बोलिये बहुत मजा आ रहा है धक्के लगाते रहिये
मेरी बात सुनने की देरी थी उन्होंने एक हाथ मेरी चूतड़ों पर रखा और पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और दूसरा हाथ मेरी पीठ पर रख मुझे कस लिया
मैंने भी उनको कस के पकड़ लिया और उनके होठों पर होंठ रख चूमने और चूसने लगी उनके धक्के ज़ोर पकड़ने लगे और जिस तरह से उन्होंने मुझे पकड़ सहारा दिया था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं खड़ी नहीं बल्कि लेटी हुयी हूं
वो मुझे लगातार 10-15 धक्के मारते तेज़ी से फिर 2-3 धक्के पूरी ताकत से मारते और लंड पूरा मेरी चूत में दबा देते जड़ तक और कुछ पल अपनी कमर गोल गोल घुमा कर अपने लंड के सुपारे को मेरी बच्चेदानी के ऊपर रगड़ते
सच में इस तरह से मुझे बहुत मजा आ रहा था भले ही उनके ज़ोरदार झटकों से कभी कभी लगता कि मेरी चूत फट जायेगी पर जब वो सुपारे को रगड़ते तो जी करता कि ज़ोर ज़ोर से फिर झटके मारे
मेरी हालत अब और बुरी होने लगी थी मैं वासना के सागर में गोते लगाने लगी थी मेरा मन पल दर पल बदल रहा था कभी उनके झटके मेरी चीख निकाल देते और सोचने लगती भगवान ये जल्दी से झड़ जायें
तो कभी उनके सुपारे का स्पर्श इतना सुहाना लगता कि मन में आता कि भगवान बस ऐसे ही करते रहें जैसे जैसे हमारे संभोग की समय बढ़ता जा रहा था वैसे वैसे ही मेरे जोश और बदन में बदलाव आ रहा था
मैं पल पल और भी व्याकुल सी हो रही थी और मेरी चूत से पानी जैसा चिपचिपा रस रिस रहा था जो अब तो मेरी जांघों से होता हुआ नीचे बहने लगा था
उधर वो भी पागलों की तरह धक्के मार रहे थे मुझे और मेरी चूत का अपने लंड से ज़ोरदार मंथन करते हुये पसीने से लथपथ होते जा रहे थे
वो मुझे चूमते काटते मेरे मम्मों को चूसते हुये हांफते रहे पर उनका धक्का लगाना कम नहीं हुआ कभी रुक रुक कर तो कभी लगातार वो मुझे भी अपने साथ पागल किये जा रहे थे
मैं भी उनके साथ साथ अपनी कमर हिलाने डुलाने लगी उनके धक्कों से ताल मिला कर हमे संभोग करते हुये करीब 20 मिनट हो चुके थे और मेरी एक जांघ में दर्द सा होने लगा था पर मैं पूरे जोश में थी खुद ही दूसरी टांग उठाने लगी
यह देख वो मेरी दोंनों जांघों को दबोच मुझे उठाने का प्रयास करने लगे मैं इतनी मोटी और भारी भले कैसे उठा पाते वो पर पीछे दीवार का सहारा थे तो मुझे उठा लिया और धक्के देते रहे
मैंने भी उनके गोद में आते ही अपनी दोनों टांगें उनकी कमर पर लपेट दी हवस के नशे में कहां होश था कि वो मुझे उठाने लायक हैं या नहीं
मैं उनके गले में हाथ डाल झूलते हुये लंड को चूत में दबाती रही वो भी मुझे ऐसे ही मेरे चूतड़ों को पकड़ मुझे अपनी गोद में झुलाते धक्के देते रहे
करीब 3-4 मिनट के बाद उनकी ताकत कम सी होने लगी और उन्होंने मुझे वैसे ही अपनी गोद में उठाये अपने लंड को मेरी चूत में घुसाए हुये मुझे जमीं पर लिटा दिया
वो मेरे ऊपर झुकाते हुये अपने दांतों को पीसते हुये मेरे मम्मों को काटने और चूसने लगे और जैसे खीज में हो बड़बड़ाने लगे आज जी भर चोदूंगा तुम्हें चोद चोद के तुम्हारी बूर का पानी सुखा दूंगा
मैं उनके काटने और चूसने से सिसकारियां लेने लगी और कराहने भी लगी पर मेरे मुख से भी वासना भरी पुकार निकलने लगी
ऊईई ईईइ सीईई आह्ह छोड़ो ना मैं झड़ने वाली हूं झाड़ दो मुझे और बस इतना कहना था कि उनके धक्के किसी राकेट की तरह तेज़ी से पड़ने लगे और मैं ओह माँ ओह माँ करने लगी
मैंने दोनों टांगें उनके सीने तक उठा दी और ज़ोर से पकड़ लिया उनको 5 मिनट ही हुये होंगे उनके इस तरह के तेज़ धक्कों की ओर मैं अपनी चूत सिकोड़ते हुये झड़ गयी
मैं उनको कस के पकड़ते हुये अपनी कमर उठाने लगी और उनका लंड पूरा पूरा मेरी बच्चेदानी में लगता रहा जब तक कि मेरी चूत से पानी झड़ना खत्म ना हुआ
मैं अभी भी चित लेटी उनके धक्के सह रही थी क्योंकि जानती थी वो अभी झड़े नहीं बल्कि और समय लगेगा क्योंकि दोबारा मर्द जल्दी झड़ते नहीं
मेरी पकड़ अब ढीली पड़ने लगी थी मेरी टांगें खुद उनके ऊपर से हट कर जमीं पर आ गयी थी मैं उन्हें हल्की ताकत से बाहों से पकड़ी सिसकती और कराहती धक्के खा रही थी
वो मुझे अपने दांतों को भींचते हुये मुझे देख धक्के लगाते ही जा रहे थे और मैं उन्हें देख रही थी कि उनके सर से पसीना टपक रहा था और नीचे चूत और लंड की आसपास तो झाग के बुलबुले बन गये थे
करीब 7-8 मिनट यूं ही मुझे धक्के मारने के बाद उन्होंने मुझे उठाया और अपनी टांगें आगे की तरफ फैला मुझे गोद में बिठा लिया मैं समझ गयी कि अब धक्के लगाने की बारी मेरी आ गयी पर मेरी हिम्मत अब जवाब देने लगी थी
वो मुझे अपने दांतों को भींचते हुये मुझे देख धक्के लगाते ही जा रहे थे और मैं उन्हें देख रही थी कि उनके सर से पसीना टपक रहा था और नीचे चूत और लंड की आसपास तो झाग के बुलबुले बन गये थे
करीब 7-8 मिनट यूं ही मुझे धक्के मारने के बाद उन्होंने मुझे उठाया और अपनी टांगें आगे की तरफ फैला मुझे गोद में बिठा लिया
मैं समझ गयी कि अब धक्के लगाने की बारी मेरी आ गयी पर मेरी हिम्मत अब जवाब देने लगी थी मैं भी आधे मन से उनके लंड के ऊपर बैठने उठने लगी जिससे लंड चूत में अंदर बाहर होने लगा
पर यह क्या मेरी पकड़ कुछ पलों के धक्कों में फिर से मजबूत हो गयी और मेरी चूत भी कसने लगी मैं फिर से गर्म हो गयी और जोरों से धक्के लगाने लगी
मुझे ऐसा लगने लगा कि अब तो मैं फिर झड़ जाऊँगी और पता नहीं क्यों मेरा मन फिर से पानी छोड़ने को होने लगा मैं तेज़ी से धक्के लगाने लगी तो वो भी मेरी हरकतें देख नीचे से ज़ोर ज़ोर झटके देने लगे
हम दोनों हांफ रहे थे और एक दूसरे को देखते हुये बराबर धक्के लगाने लगे इतने में मेरा फिर से फोन बजने लगा मैं उसकी आवाज दरकिनार करते हुये पूरे जोश से लंड को चूत में घुसाने लगी तेज़ी से
मैं अपनी कमर इतना उठा देती कि लंड का सुपाड़ा ही बस अंदर रहता और ज़ोर से फिर धकेलती कि लंड पूरा चूत में मेरी बच्चेदानी तक जाता
मैं ये सब तेज़ी से करने लगी और फिर एक पल ऐसा आया जिसका मुझे इंतज़ार था जिसके लिये मैं इतनी मेहनत कर रही थी फिर से मेरी पूरा बदन अकड़ने लगा चूत सिकुड़ने लगी
मैंने एक झटके के साथ उनके होठों से अपने होंठ भिड़ा दिए और जुबान को चूसने लगी गले में हाथ कस दिए और लंड जबकि पूरा मेरी बच्चेदानी तक था
फिर भी मेरी कमर हिल हिल कर धक्के देते हुये मैं झड़ने लगी मैंने चिपचिपा पानी सा रस छोड़ दिया उनके लंड के ऊपर से जो उनके अण्डकोषों और जांघों को भीगा रहा था
धीरे धीरे मेरे धक्के कमज़ोर पड़ते गये और मैं तब रुकी जब मैं पूरी तरह चरम सुख तक पहुंच गयी मैं उनकी गोद में ही थी और उनका लंड मेरी चूत के भीतर ही था
मैंने कहा- अब बस करें बार बार फोन बज रहा है घर जाना है
उन्होंने मुझसे कहा- बस थोड़ी देर और अभी तो मजा आना शुरू हुआ है
हम बातें करते हुये कुछ पल ऐसे ही हल्के धक्के लगाते रहे फिर मैंने फोन सामने से उठा कर देखा तो तारा का मिस कॉल था
मैंने उनसे कहा- अब या तो जाने दो या जल्दी करो तारा परेशान हो रही होगी
इतना कहना था कि तारा का फोन फिर से आ गया मैं तो जानती थी कि तारा को सब मालूम है मैंने फोन उठा लिया फोन उठाते ही आवाज आयी और कितना टाइम लगेगा?
मैंने जवाब दिया- बस निकलने की तयारी कर रही हूं
वो भी समझ गयी उसने फोन रख दिया
उन्होंने मुझे उठने का इशारा किया और मैं बिस्तर पर जाकर लेट गयी वो भी उठ कर आये और मेरी टांगों के सामने घुटनों के बल खड़े हो गये
मैंने स्वयं ही अपनी टांगें फैला दी उनके लिये पर उन्होंने मेरी टांगें उठा कर अपने कंधो पर रखी और लंड को हाथ से हिलाते हुये मेरी चूत की छेद पे टिका कर घुसाने लगे
लंड मेरी चूत में घुसते ही वो मेरे ऊपर पूरी तरह लेट गये और अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ पकड़ कर मेरे होठों को चूसते हुये धक्के लगाते हुये संभोग करने लगे
मैंने अपनी टांगें उठा कर उनकी जांघों पर रख दी और उनका मुँह अपने होठों से अलग करते हुये बोली अब जल्दी जल्दी करो देर हो रही है
तब उन्होंने भी तेज़ी से धक्के लगाने शुरू कर दिए और मैंने भी जल्दी खत्म हो सोच कर अपनी कमर उनके हर धक्के पर उठाने लगी
2 मिनट के धक्कों में मैं फिर से गर्म होने लगी और फिर क्या था उनके जोश और मेरे जोश से धक्कों की रफ़्तार और ताकत इतनी हो गयी कि बिस्तर भी हिलने लगा
मैं कराहते और सिसकते हुये पूरी मस्ती में उनके लंड से अपनी चूत को रगड़ते हुये धक्के लगाने लगी वो मेरे चूतड़ों को पूरी ताकत से दबाते हुये खींचते और ज़ोर ज़ोर से धक्के देते तो कभी मेरे मम्मों को बेरहमी से काटे और चूसते
इधर मैं भी कभी उनके सर के बालों को ज़ोर ज़ोर से खींचती तो कभी अपनी टांगों से उनको पूरी ताकत लगा दबोचने की कोशिश करते हुये अपनी कमर उठा देती जिससे लंड मेरी चूत की पूरी गहराई तक जाता
पूरा कमरा हम दोनों के हांफने और सिसकारने से गूंजने लगा था करीब 10 मिनट के ज़ोरदार धक्कों के बाद वो पल भी आ गया जिसके लिये हम दोनों इस तरह मेहनत कर रहे थे
मैं उनके सुपाड़े की गर्मी को अपनी बच्चेदानी में महसूस करने लगी और समझ गयी कि अब वो झड़ने को हैं और इधर मेरी जांघों और चूत में भी अकड़न होने लगी
मेरी साँसें लम्बी होने लगी उधर उनके भी धक्के तेज़ी से मुझे लगने लगे मैं कराहते हुये उन्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह करते हुये पानी छोड़ने लगी और उनको पूरी ताकत से पकड़ अपनी कमर बार बार उठा कर नीचे से धक्के देने लगी
वो भी अपनी पूरी ताकत के 15-20 धक्के लगाते हुये मुझसे चिपक गये और अपना रस मेरी चूत की गहराई में छोड़ कर शांत हो गये
मैं भी उनके शांत होते ही 2-4 झटके देती हुयी उनको पूरी ताकत से पकड़ शांत हो गयी मैं धीरे धीरे अपनी पकड़ ढीली करने लगी कुछ देर क बाद और भीतर से थकी और संतुष्ट सी लगने लगी
उनका भी शरीर अब ढीला पड़ने लगा और उनका लंड मेरी चूत के भीतर सिकुड़ने लगा कुछ देर के बाद हम दोनों उठे और बाथरूम जाकर खुद को साफ किया फिर अपने अपने कपड़े पहन कर तैयार होकर तारा को फोन किया
तारा के आते ही हमने चाय मंगवाई और बातें करने लगे शाम के करीब 4 बज गये थे मुझे घर भी जाना था तो मैं जल्दी निकलने के चक्कर में थी पर तारा और उनकी बातें बढ़ती ही जा रही थी
मैंने जल्दी जल्दी निकलने को बोला उन्हें और फिर हम अपने अपने घर चले आये रात को सोते समय जब मैं कपड़े बदल रही थी गौर किया कि मेरी पैंटी में दाग सा है जो सूख कर कड़ा हो गया है
मुझे फिर याद आया कि उनका वीर्य मेरी चूत के भीतर से बह कर मेरी पैंटी गीली कर गया था इसी वजह से रास्ते भर मुझे मेरी पैंटी गीली गीली सी लग रही थी
बाकी कहानी hindi sex story के अगले भाग में
Antarvasna Sex Stories :- काम वासना की आग- 5