काम वासना की आग- 3

आप ने antarvasna sex stories के पिछले भाग में पढ़ा मैंने अपनी टांगों को उठा कर उनकी जांघों के ऊपर रख दिया और अब वो मुझे चूमते हुये अपने लिंग को मेरी चूत के अंदर धकेलने लगे मुझे बहुत मज़ा आने लगा था और उनको भी अब आप antarvasna sex stories में आगे पढ़े

Antarvasna Sex Stories 3

तभी तो कुछ पलों के बाद उनकी गति तेज़ होने लगी और एक मर्दाना ताकत का एहसास मुझे होने लगा करीब 7-8 मिनट होते होते झटकों में काफी तेज़ी के साथ साथ ज़ोर भी आने लगा और मेरी सिसकारियों में भी तेजी आ गयी

उनके हर झटके पर मैं कुहक सी जाती और ऐसा लगता ही नहीं कि ये इतनी उम्र के मर्द हैं काफी देर के बाद उनके झटके रुक रुक के और धीमी हो कर लगने लगे पर हर झटके पर मुझे मेरी बच्चेदानी में चोट का असर दिखता

जिससे मुझे और भी मजा आता और मैं कभी कभी उनको कस कर पकड़ कर जांघों से उन्हें भींचती और कराहते हुये अपनी कमर ऊपर उठा देती और चूत को लिंग पर दबाने लगती

हम दोनों वासना के सागर में डूब चुके थे और मस्ती में खो गये थे करीब 15 मिनट हम इसी तरह एक दूसरे की नजरों से नज़रें मिलाए हुये संभोग करते रहे पर अब मुझे महसूस होने लगा था कि वो थक चुके हैं उनके धक्कों में ढीलापन आ गया था

वो पसीने पसीने हो गये थे और सांसें भी लम्बी लम्बी ले रहे थे इधर मेरे जिस्म की आग इतनी तेज़ हो गयी थी कि मुझे बस तेज़ धक्कों की इच्छा हो रही थी

मैंने ज़ोर देकर उन्हें इशारा किया पर वो मेरे ऊपर से उठ गये और बगल में लेट गये

मैंने उनसे पूछा- क्या हो गया आपका?

तब वो बोले- नहीं अब तुम ऊपर आ जाओ और चुदो

मैंने देखा उनका लिंग भीग कर चमक रहा था और बार बार तनतना रहा था इधर जब मैंने अपनी चूत की तरफ देखा तो चूत के किनारों पर सफेद झाग सा था और चूत के बालों पर हम दोनों का पसीना और पानी लग कर चिपचिपा सा हो गया था

मैंने तुरंत बगल में पड़े तौलिये से अपनी चूत को साफ़ किया और उनके ऊपर अपनी टांगें फैला कर बैठ गयी मैंने एक हाथ से चूत को फैलाने की कोशिश की और दूसरे हाथ से लिंग को पकड़ सीधा कर चूत के छेद पर रास्ता दिखाते हुये कमर नीचे दबाने लगी

मेरी चूत भीतर से इतनी गीली हो चुकी थी कि बस लिंग को छेद पर टिकाने की देरी थी मैंने जैसे ही अपनी कमर उनके ऊपर दबाई लिंग सटाक से मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर समा गया

मैंने अपने घुटनों को बिस्तर पर सहारा दिया और अपनी कमर का पूरा वजन उनके लिंग पर रख उनके ऊपर झुक कर अपने मम्मों को उनके मुंह में दे दिया

वो मेरे मम्मों को चूसने काटने लगे और मैं मछली की तरह मचलती हुयी कमर हिला कर लिंग को अपने अंदर बाहर करने लगी

मैं तेज़ी से धक्के दे रही थी और सिसकार भी रही ही उधर वो एक हाथ से मेरे मम्में को मसल मसल कर पी रहे थे और दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ों को दबाते और सहलाते हुये संभोग का मजा ले रहे थे

जब जब मैं धक्के लगाती मुझे मेरी चूत के भीतर उनके सुपारे के खुलने और बंद होने का सा महसूस हो रहा था मैं करीब दस मिनट तक धक्के लगाती रही और मुझे भी थकान सी होने लगी थी

मेरे धक्कों की गति धीमी होने लगी थी और जांघों में अकड़न सी महसूस होने लगी थी पर मन में बस चरम सुख ही था तो मैं धीरे धीरे धक्के लगाती रही

पर बीच बीच में उनके झटके मुझे नीचे से भी मिलते जो इतने तेज़ होते कि मेरे मुंह से सिसकारी के साथ निकलता प्लीज धीरे वो झटके मेरी बच्चेदानी में लिंग की मार होते थे

मैं थकने के साथ साथ झड़ने के करीब ही थी पर उनकी स्थिति देख कर लग रहा था जैसे अभी उन्हें काफी समय लगेगा उन्होंने मुझे उठने का इशारा किया मैं उठ कर बिस्तर पर बैठ गयी

फिर वो भी उठ कर बैठ गये और मुझे घुटनों के बल आगे की तरफ झुका दिया मैं अपने हाथों और घुटनों के बल झुक गयी जैसे कुतिया होती है

वो मेरे पीछे गये और मेरे बड़े बड़े मांसल चूतड़ों को हाथों से सहलाने और दाबते हुये चूमने लगे बोले कितने मस्त चूतड़ हैं तुम्हारे फिर घुटनों के बल खड़े होकर उन्होंने मेरी चूत में लिंग घुसा दिया

मैं तो उनकी तारीफ़ सुनी अनसुनी करती बस लिंग को अपनी चूत में चाहती थी सो बस अपनी गांड हिलाते हुये मजे लेने लगी

कुछ ही देर में वो इतनी तेज़ी और जोरों से धक्के मारने लगे कि मुझे लगा कि अब तो मैं गयी आह्ह्ह्ह ऊउईइ ओह्ह्ह्ह करती हुयी मैं बिस्तर पर गिरने लगी

मेरी चूत की नसें सिकुड़ने लगी थीं मेरे हाथों और टांगों की मांसपेशियां अकड़ने लगी थीं तभी उन्होंने सामने रखे दोनों तकियों को मेरी चूत के नीचे रख दिया और मैं पूरी तरह से बिस्तर पर लेट गयी

मेरे साथ साथ मेरे ऊपर अपने लिंग को मेरी चूत में दबाते हुये वो भी मुझ पर गिर गये थे मेरी सांसें तेज़ हो गयी थीं मेरे मुख से मादक आवाजें निकल रही थीं और उनके झटकों के थपेड़े मेरे कूल्हों पर पड़ रहे थे

मैंने अपनी चूत को भींचना शुरू कर दिया था मुझे लगने लगा था कि रस का फव्वारा मेरी नाभि से छूट रहा है जो चूत के रास्ते निकलने वाला है

मैंने बिस्तर के चादर को ज़ोर से पकड़ लिया अपनी गांड को जोरों से हिलाने लगी चूत को भींचते हुये झड़ने लगी और मेरे मुंह से निकलने लगा प्लीज रुको मत चोदते रहो प्लीज और तेज़ और तेज़ अह्ह्ह आह्ह ओह्ह्ह हायय और तेज़ और तेज़

मेरी ऐसी हालत देख वो और तेज़ी से धक्के मारने लगे मैं उनके हर वार को अपनी चूत में महसूस करने लगी और मुझे सच में बहुत मजा आने लगा था

फिर तभी मेरी चूत जैसे सख्त हो गयी और चूत से पेशाब की धार निकलेगी ऐसा लगा मैंने अपनी गांड उठा दी सांसें मेरी रुक सी गईं मैंने चूत को सिकोड़ दिया और पानी छोड़ते हुये झड़ गयी

इधर मैं अपनी सांसों को काबू करने में लगी थी उधर वो मुझे धक्के पर धक्के दे कर संभोग किए जा रहे थे मैं अपने जिस्म को ढीला करने लगी थी पर वो अभी भी धक्के लगा रहे थे और मेरे मुंह से कराहने की आवाजें कम नहीं हो रही थीं

करीब 4-5 मिनट धक्के लगाने के बाद उनका लिंग मेरी चूत में पहले से भी ज्यादा सख्त और गरम लगने लगा मैं समझ गयी कि अब वो झड़ने वाले हैं पर मैं नहीं चाहती थी कि उनका रस मेरी चूत में गिरे तो मैंने तुरंत उन्हें हटाने की कोशिश की

पर उन्होंने एक हाथ से मेरा सर ज़ोर से बिस्तर पर दबा दिया और एक हाथ से कंधे को रोक सा दिया मैं नहीं नहीं करती ही रही कि उनके ज़ोरदार 8-10 धक्कों के साथ पिचकारी की तेज़ धार मेरी चूत के भीतर महसूस हुयी

वो झड़ते हुये और हांफते हुये मेरी पीठ के ऊपर निढाल हो गये मैं समझ गयी कि मेरी कोशिश बेकार गयी और उन्होंने अपना बीज मेरे भीतर बो दिया सो अब कोई फ़ायदा नहीं

उनकी आंखें बंद थीं और धीरे धीरे उनका लिंग मेरी चूत के भीतर सिकुड़ कर अपनी सामान्य स्थिति में आ गया हम दोनों कुछ देर यूं ही पड़े रहे

फिर मैंने उन्हें अपने ऊपर से हटने को कहा वो जैसे ही हटे मैंने देखा तकिया पूरी तरह से भीग गया था उनका सफेद और गाढ़ा रस मेरी चूत से बह कर बाहर आने लगा

मैं जमीन पर खड़ी हुयी और तुरंत बाथरूम गयी वहां से खुद को साफ़ करके वापस आई तो देखा कि 2 बज चुके हैं हमें अपनी काम क्रीड़ा में इसका पता ही नहीं चला

वो अभी भी नंगे बिस्तर पर सुस्ता रहे थे

मैंने कहा- मुझे जाना होगा और मैं अपने कपड़े समेटने लगी

मैं जैसे ही अपनी पैंटी लेने बिस्तर के करीब गयी उन्होंने मुझे फिर से पकड़ लिया और बिस्तर पर खींचने लगे अब मैं विनती करने लगी बहुत देर हो जाएगी सो मुझे छोड़ दें

पर उन्होंने अपनी ताकत लगाते हुये मुझे अपने करीब लेकर मुझे सीने से चिपका लिया और बिस्तर से उठ खड़े हो गये उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भींचते हुये कहा इतनी भी जल्दी क्या है अभी मेरा दिल भरा नहीं है

मैंने विनती करनी शुरू कर दी- अगर देर हुयी तो मेरे घर में बच्चे और परिवार वाले शक करेंगे पर वो मेरी बात जैसे सुनने को तैयार ही नहीं थे वे मुझे चूमते हुये धकेलने लगे और मैं बाथरूम के दरवाजे के पास दीवार से टकरा गयी

मैं बार बार नहीं नहीं कर रही थी पर उन्होंने मुझे इतनी ज़ोर से पकड़ रखा था कि मैं पूरी ताकत लगा कर भी अलग नहीं हो पा रही थी

मेरे बार बार कहने को सुन कर उन्होंने अपना मुंह मेरे मुंह से लगा दिया और मेरा मुंह बंद कर दिया उन्होंने अब अपने हाथ मेरे पीठ से हटा के चूतड़ों पर रख दिए

अब मेरे चूतड़ों को ज़ोर से दबाते हुये ऐसा करने लगे जैसे उन्हें फैलाना चाहते हों मैंने अपनी टांगें आपस में चिपका रखी थीं और मेरा पूरा बदन टाइट हो गया था

वो अब मुझे चूमते हुये अपनी जुबान मेरे मुंह में घुसाने का प्रयास करने लगे पर मैंने अपने दोनों होंठों को पूरी ताकत से बंद कर रखा था

उनके काफी प्रयास के बाद भी जब मैंने अपना मुंह नहीं खोला तो उन्होंने मेरी निचले होंठ को अपने दोनों होंठों से दबा लिया और खींचने चूसने लगे फिर दांतों से दबा कर ज़ोर से काट लिया

मैं दर्द से सिसियाई और मैंने अपना मुंह खोल दिया फिर क्या था उन्होंने तुरंत अपनी जुबान मेरे मुंह में घुसा दी और मेरी जुबान को टटोलने लगे

मैं भी अब समझ गयी कि यह इंसान मानने वाला नहीं है मैं भी अपनी जुबान को उनकी जुबान से लड़ाने लगी उधर वो मेरे चूतड़ों को दबाते और खींचते हुये अपने शरीर को मेरे शरीर से चिपकाते और धकेलते रहे हम दोनों काफी देर तक चूमते रहे

अभी हमें संभोग किए मुश्किल से आधा घंटा ही हुआ होगा कि मुझे महसूस होने लगा कि उनका लिंग खड़ा हो रहा और मेरी नाभि को सहला रहा

मेरी लम्बाई उनसे काफी कम थी सो उनका लिंग मेरी नाभि को छू रहा था उनका अंदाज भी ऐसा था जैसे मेरी नाभि को ही संभोग केंद्र समझ लिया हो

मैंने अपने पेट पर ज्यादा दबाव देख कर उनका लिंग हाथ से पकड़ लिया और हिलाने लगी मेरे द्वारा उनके लिंग को कुछ ही पलों तक हिलाने से उनका लिंग पूरी तरह सख्त होकर खड़ा हो गया जो कि मेरी चूत में घुसने को तैयार हो चुका था

उन्होंने मुझे चूमना छोड़ कर मेरे मम्मों को चूसना शुरू कर दिया वे बारी बारी से झुक कर थोड़ा थोड़ा चूस कर मुझे गरम करने लगे उनका हाथ मेरे चूतड़ों से हट कर मेरी जांघों में चला गया और कस के पकड़ कर उन्हें फैलाने की कोशिश करने लगे

मैं भी अब थोड़ा जोश में आने लगी और मेरी चूत फिर से गीली होनी शुरू हो गयी मैंने भी अपनी टांगें फैला दीं और चूत उनके आगे खोल दी

वो अब मेरी दोनों टांगों के बीच चले आए और कमर थोड़ा झुका कर मेरी चूत के बराबर खड़े होकर अपने लिंग को मेरी चूत पर धकेलने लगे

मैंने उनका लिंग अभी भी पकड़ रखा था और हिला रही थी पर जैसे ही उनका लिंग मेरी चूत के भग्नासे को छुआ मैं ऊपर से लेकर नीचे तक गनगना गयी

मैं तो पहली बार से भी ज्यादा खुद को गर्म महसूस करने लगी और उनके लिंग को पकड़ कर अपनी चूत की दरार के बीच ऊपर नीचे रगड़ने लगी

मैंने अपनी चूत को आगे की तरफ कर दिया और उनके लिंग के सुपाड़े को अपनी दाने जैसी चीज़ पर रगड़ने लगी वो अब मेरी जांघों को छोड़ कर मेरे मम्मों को ज़ोर ज़ोर से मसल कर मेरे मम्मों को दांतों से दबा दबा कर खींचने और चूसने लगे

मुझे अपने मम्मों में दर्द का तो एहसास हो ही रहा था पर उस दर्द में भी पता नहीं गर्म होने की वजह से मजा आ रहा था मैं ज़ोर ज़ोर से लम्बी सांसें ले रही थी और मेरी सिसकियां उनकी हरकतों के साथ ताल मिला रही थीं

मैं अब पूरी तरह से बेकरार सी हो गयी और मैंने अपनी एक टांग पास में पड़ी कुर्सी पर रख अपनी चूत के छेद को लिंग के निशाने पर रख दिया और लिंग पकड़ कर सुपारे को चूत में घुसा लिया

फिर मैंने उनके चूतड़ों को दोनों हाथ पीछे ले जाकर खुद को एक टांग से सहारा देकर अपनी चूत उनके तरफ धकेला लिंग आधा सरसराता हुआ मेरी चूत में घुस गया

पता नहीं उनको मेरी चूत में लिंग घुसा हुआ महसूस हुआ या नहीं क्योंकि वो अभी भी मेरे मम्मों से खेलने और चूसने में व्यस्त थे

मैंने खुद ही अपनी चूत को उनके लिंग पर धकेलना शुरू कर दिया और लिंग अंदर बाहर होने लगा पर शायद उनके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था उन्होंने मेरी चूत से अपना लिंग बाहर खींच लिया और मुझे चूमते हुये नीचे बैठ गये

उन्होंने पहले मेरी नाभि और पेट में ढेर सारा चुम्बन किया और फिर मेरी चूत को एक हाथ से सहला कर चूत को चूमने लगे

थोड़ी देर बाद उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरी चूत के दोनों होंठों को फैला दिया और दो उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगे

मैं तो पहले से इतनी गीली हो चुकी थी कि क्या कहूं ऐसा लगने लगा था जैसे मेरी जान निकल जाएगी थोड़ी देर उंगली से खेलने के बाद मेरी चूत को उन्होंने और फैला दिया

तो मैं कराह उठी और अपनी जुबान मेरी चूत से चिपका दी वो मेरी चूत को चूसने लगे और जुबान को मेरी चूत के छेद पर धकेलने लगे

उनके इस तरह करने से मैं और भी उत्तेजित हो रही थी और ऐसा लगने लगा कि अब ये मुझे ऐसे ही झड़ जाने पर मजबूर कर देंगे

मैंने उनके सर को पकड़ा और बालों को खींचते हुये ऊपर उठाने का प्रयास करने लगी ताकि हम संभोग शुरू करें पर वो हिलने को तैयार नहीं थे

मैंने अपनी एक टांग से खुद और ज्यादा सहारा नहीं दे पा रही थी कि तभी उन्होंने मेरी दूसरी टांग जो कुर्सी पर थी उसे उठा अपने कंधों पर रख दिया और अपना मुंह मेरी चूत से चिपका कर चूसने लगे ऐसे जैसे रस पीना चाहते हों

मेरे लिए अब बर्दाश्त करना मुश्किल था और मैंने दोनों जांघों के बीच उन्हें कस कर दबा लिया पर उन पर तो कोई असर ही नहीं था

वो अपनी जुबान को मेरी चूत के छेद में घुसाने का प्रयास करते तो कभी मेरी चूत के होंठों को दांतों से खींचते तो कभी मेरे दाने को काट लेते और मैं कराहती हुयी मजे लेती रही

मैं अब उनसे विनती करने लगी- आह्ह बस करो और शुरू करो ना मुझे घर भी जाना है

बाकी कहानी hindi sex story के अगले भाग में

Antarvasna Sex Stories :- काम वासना की आग- 4

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