हैलो दोस्तों बहुत दिन हो गये मैंने कोई antarvasna sex stories अपने प्रसंसकों को नहीं सुनाई इसके लिये मुझे माफ कीजिये दरअसल बात ही ऐसी है कि पति बच्चों और परिवार के साथ कभी कभी समय ही नहीं मिलता तो कभी अकेलापन पीछे होता है
Antarvasna Sex Stories 1
पर इस अकेलेपन का भी कभी कभी अच्छा नतीजा मिल जाता है मैं थोड़े समय से punjabi sex story com से दूर रही पर अब मेरे पास एक नया अनुभव है जिसने मुझे फिर से विवश कर दिया punjabi sex story com पर कुछ लिखने को
उम्मीद करती हूं कि मेरा यह नया अनुभव आपको रोमांच से भर देगा संभोग किसे नहीं पसंद? और अगर पसंद ना होता तो ना लोग यहां hindi sex story पढ़ने आते ना सुनाने ना मैं आती ना आप लोग
मैं औरों के बारे में नहीं जानती पर जैसे जैसे मैंने सेक्स का आनन्द खुल कर लेना शुरू किया मेरी इच्छाएं और बढ़ती चली गयी और फिर नई पसंद नया अनुभव मेरी पिछली कहानियों से तो आप पता ही चल गया कैसे मैंने सेक्स के नये नये अनुभवों को पाया
पर पिछले 7 महीनों में मैंने जो कुछ जाना और किया वो मेरी बाकी के अनुभवों से कहीं ज्यादा रोचक है क्योंकि यह मैंने स्वयं ही महसूस किया
मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा करूंगी या इतनी बदल भी जाऊंगी एक औरत जिसके आगे पीछे इतने पहरे होते हैं वो इतना कुछ कैसे कर लेगी यह भी शायद आप लोग यकीन ना करो पर जो मैंने किया वो सच में रोचक था
अब असल मुद्दे पे आती हूं और आपको बताती हूं ऐसा क्या किया मैंने जो इतनी उत्सुक हूं खुद मैं आप सबको बताने के लिये दरअसल यहां झारखण्ड में बच्चों और परिवार के बीच फंसी सी थी
कभी पंजाबी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर कहानियां पढ़ती तो कभी सेक्स वीडियो देखती समय बिताती पर सही मायने में जीवन और सेक्स का मजा धीरे धीरे खत्म सा हो गया था
दिल में कुछ अलग सी चाहत थी पर समझ नहीं आ रहा था कि क्या है वो कभी संभोग करने की तीव्र इच्छा भी होती तो अकेली थी और पति का होना ना होना बराबर ही है
बस इसी बीच कभी कभार बंगलौर वाली सहेली तारा से बात करती थी और बड़े शहरों में क्या क्या हो रहा है सुनती थी वो हमेशा मुझे बताती थी कि हर शनिवार और रविवार वो किस तरह की पार्टी और लोगों से मिलती जुलती और मजे करती थी
पिछले साल होली से पहले की बात है तारा और मैं एक दोपहर बातें कर रहें थे तभी उसने मुझे बताया कि वो आने वाले शनिवार को एक नये दोस्त से मिलने वाली है
उसने बताया कि कैसे वो इन्टरनेट पे चैटिंग के जरिये उससे मिली और इस कदर दोनों खुल गये कि वो जर्मनी से मिलने भारत चला आया
एक पल तो मुझे लगा कि वो बस लम्बी लम्बी डींग हाक रही है पर जैसे ही शनिवार आया उसने मुझे उसके साथ एक फोटो भेजी अब तो शक करने का कोई सवाल ही नहीं था
उस दिन की तस्वीर ने मुझे दिन भर बैचैन कर दिया रात भर मैं बस सोचते हुये सोई कि मेरी सहेली तारा कैसे उस विदेशी के साथ होगी क्या क्या कर रही होगी
वैसे तो मैं उससे सुनती रहती थी कि वो हर शनिवार और रविवार कुछ अलग करती है उसके बहुत सारे दोस्त हैं पर यह पहली बार हुआ कि लोग ऐसे भी मिलते हैं और उनकी बस एक इच्छा होती है संभोग और मजे करना अलग अलग तरीकों से
मैं 3-4 दिन तक बस यही सोचती जब भी अकेली होती फिर एक दिन दोपहर को उसका फोन आया मैंने उत्सुकता भरे स्वर में उससे पूछना शुरू कर दिया कैसा रहा क्या हुआ सारी बातें
फिर उसने जो बताया वो सुन कर तो मैं चौंक गयी पर दिल को थोड़ा धैर्य देते हुये उसकी बातें सुनने लगी वो शनिवार रात उस विदेशी के साथ तो थी ही थी पर अगले रविवार दो जोड़े ऑस्ट्रेलिया से आये और उनके साथ एक ही कमरे में सामूहिक संभोग किया
मैं यह सुन कर अचंभित हुई पर जब उसने कहा कि उन सभी ने बारी बारी से एक दूसरे के साथ संभोग किया तो मैं और भी अचंभित हो गयी इसका मतलब था कि हर किसी ने तीन बार संभोग किया तीन अलग अलग मर्द और औरत के साथ
उस दिन तो मैं बस बैचैन हो कर सोचती रही कि कैसे किसी अनजान के साथ इतना खुल कर संभोग कर सकता है कोई पर मेरे अंदर अलग सी वासना जागने लगी थी
बात संभोग की नहीं थी जीवन में कुछ अलग करने की थी तारा की बातों ने मुझे और भी उत्सुक कर दिया था अब मैं सेक्स वीडियो देखती तो थी पर हर वक़्त कुछ अलग दिखे वो सोचती थी
मेरे अंदर वासना की एक अलग भूख सी उमड़ने लगी थी कुछ अलग करने की संभोग के अलावा कुछ और करने की मैं जब कभी अकेली होती तो अलग तरह के सेक्स वीडियो ढूंढने लगती
यहां तक कि जानवरों का सेक्स गन्दी हरकतों वाली सेक्स जैसे गाली देना या पेशाब कर देना इत्यादि मैं ज्यादातर अपना समय या तो ब्लू फिल्में देख कर बिताती या कहानियां पढ़ कर जब अकेली होती
पर सामूहिक अदला बदली लेस्बियन सेक्स पेशाब करना सौतेले मां बेटे का सेक्स योनि के अंदर वीर्यपात ये सब अच्छे लगने लगे थे और मेरे मन में भी ऐसा करने की कभी कभी इच्छा जगती पर धीरे धीरे इनसे मेरा मन उबने लगा था
तभी एक दिन तारा से बात करते हुये एक साईट के बारे में पता चला मुझे उसने मुझे बताया कि लोग वहां अपनी तरह के साथ चुनते हैं उनसे चैटिंग करते है अपनी बातें एक दूसरे से कहते हैं और भी बहुत कुछ होता है
उसने बताया कि जिस विदेशी से वो मिली और उसके बाकी के दोस्त भी सभी इसी साईट से मिले थे पहले तो मुझे बड़ी खुशी हुई कि चलो कुछ नया होगा जीवन में और मैंने रात को अपनी एक आईडी बना ली
उस साईट पे जाते ही मैंने देखा कि करोड़ों लड़के लड़कियां औरत मर्द हैं कुछ के तो ढेरो फोटो और वीडियो भी हैं
फिर मेरे मन में ख्याल आया कि इतने लोगों में पता नहीं कौन अपनी जान पहचान का होगा और क्या पता मेरा भेद खुल जाए
तो मैंने उसे बंद कर दिया पर फिर तारा ने मुझे बताया के अपना नाम पता और फोटो मत डालो बस ऐसे ही चैट करो जो अच्छा लगे कुछ मस्ती ऑनलाइन कर सकती हो
मैंने वही किया जैसे ही मैंने अपनी आईडी खोली देखा तो बहुत से मर्दो औरतों के मैसेज थे कुछ अपनी उम्र के तो कुछ बड़े और ज्यादातर छोटे
मैं उन्हें पढ़ने लगी कुछ के मैंने उत्तर भी दिए जो मुझे मेरी तरह के लगे अब मैं हर रोज जब मौका मिलता ऑनलाइन आती और ढेरों लोगों से बातें करती कुछ अच्छे मिलते कुछ बुरे
जो मुझे अच्छे लगते उनसे मैं रोज बातें करने लगी इनमें से कुछ ने अपनी फोटो मुझे भेजी जिनमें से एक आर्मी रिटायर्ड देहरादून के एक आदमी से दोस्ती हो गयी मेरी अच्छी हम रोज बातें करने लगे एक दूसरे के जीवन के बारे में एक दूसरे की इच्छाओं के बारे में
मुझे उनमें यह बात अच्छी लगी कि बाकी लोगो की तरह वो हमेशा सेक्स की बातें नहीं करते थे फिर उन्होंने तीन महीने के बाद मुझसे मेरी फोटो मांगी पता नहीं शुरू में तो मैंने मना किया पर रात होते होते खुद ही भेज दी
मेरी फोटो देखते ही उन्होंने मुझे मैसेज किया क्या यह सच में तुम हो?
मैंने जवाब दिया- हां
उन्होंने कहा- तुम बहुत सुन्दर हो लगती नहीं कि तुम 46 साल की हो?
मैंने कहा- तारीफ करने के लिये धन्यवाद पर मैं इतनी भी खूबसूरत नहीं हूं
उन्होंने कहा- चेहरे से लगता नहीं कि तुम्हारे तीन बच्चे हैं पर जिस्म से लगता है
मैंने कहा- आप जिस्म देख कर पता लगा लेते हो कि किस औरत के कितने बच्चे हैं?
उन्होंने कहा- नहीं तुमने बताया था कि तुम्हारे तीन बच्चे हैं तो ये फोटो देख कर यकीं हो ही जाता है कि तुम्हारे तीन बच्चे हैं
बस इसी तरह बातें करते हुये पता नहीं चला कि कब चार बज गये रात के कुछ दिनों तक हम ऐसे ही बाते करते रहे हम दोनों सेक्स के मामले में तो पहले ही खुल चुके थे और रात को ज्यादातर सेक्स की ही बातें करते थे
फिर एक रात बातें करते हुये वो कुछ ही गर्म हो गये और कहने लगे मैं तुमसे मिलना चाहता हूं मैंने शुरू में सोचा कि हो सकता है जोश में भावुक होकर वो ऐसा कह रहे हों
पर उन्होंने मुझे कहा- क्या तुम मुझे कैमरे पर देखना चाहोगी अभी?
मैंने पूछा- यह कैसे संभव है?
उन्होंने मुझे एक आईडी भेजी और कहा कि इसे अपने कंप्यूटर पे खोलो मैं शुरू में तो हिचकिचाई कि इतनी रात को कंप्यूटर की लाइट जली देख किसी को भी शक हो सकता है तो मैंने मना किया
फिर थोड़ी देर बाद मैंने खुद ही कंप्यूटर खोल आईडी खोली और उनको बता दिया तुरंत बाद मेरे कंप्यूटर पर एक संदेश आया कि इसे खोलो मैंने खोला तो देख कर दंग रह गयी
एक 59 साल का आदमी कच्छे और बनियान में बैठा था मैंने उनको पहचान तो लिया था पर फोटो में वो जवान दिख रहे थे और यहां बूढ़े
पहले तो मेरी शंका दूर की उन्होंने कि फोटो भी असली थी और ये भी और मैंने भी बात मान ली क्योंकि मुझे कौन सी उनसे शादी करनी थी
हम फिर वही सेक्स की बातें करने लगे और फिर उन्होंने अपना बनियान और कच्चा निकल दिया मैं एकदम से चौंक गयी कि हे भगवान यह आदमी नंगा हो गया
वो थोड़ा घुटनों के बल बेड पे उठे तो सामने उनका तन तनाया हुआ लिंग था करीब सात इंच लम्बा और 3 इंच मोटा लिंग की स्थिति देख समझ में आ गया था कि वो बहुत उत्तेजित है
तभी उन्होंने अपने लिंग को पकड़ा और ऊपर की चमड़ी को सरका के पीछे कर दी और उनका सुपाड़ा खुल के सामने आ गया इस स्तिथि में वो लिंग बहुत ही आकर्षक लग रहा था यह नजारा देख पता नहीं मेरी योनि में नमी सी होने लगी थी
तभी उन्होंने कहा- जब से तुम्हारी फोटो देखी है तब मैं तुम्हें चोदने के सपने देखता हूं
उनका जिस्म और उम्र देख कर तो लगता नहीं था कि वो संभोग ज्यादा देर कर सकते हैं पर फिर मुझे अपने फूफाजी की बात याद आई उस रात उन्होंने हाथ से हिला के मुझे अपना वीर्य भी दिखाया कितना गाढ़ा और सफेद था
उसे देख मैं भी उत्तेजित सी हो गयी थी पर मैं सोने चली गयी बस उस लिंग को सोचते हुये क्योंकि रात काफी हो गयी थी
इसके बाद तो बाते होती रही और लगभग हर बार मुझे मिलने की बात कहते उनकी इन बातों से कभी कभी मेरे मन में भी ऐसे ख्याल आते पर यह सब संभव नहीं था जानती थी सो ज्यादा धयान भी नहीं देती थी
हम धीरे धीरे इतने घुलमिल गये कि हर 3-4 दिन में मैं उन्हें हस्तमैथुन करने में मदद करती और देखती उनको कंप्यूटर पे अपना रस निकलते हुये
वो हमेशा तरह तरह की बातें करते मुझसे मुझे बताते कि किस तरह से वो कल्पना करते हैं मुझे चोदने और मैं भी कभी कभी उनकी कल्पनाओं में खो जाती
फिर एक दिन वो कहने लगे कि हमें मिलना चाहिये और उनकी यह बात अब जिद सी बन गयी पर मैं ना तो अकेली कहीं जा सकती थी और ना किसी से अकेली मिल सकती थी तो मेरे लिये मुमकिन नहीं था
पर मुझे भी अपने अंदर की वासना कमज़ोर बना देती पर किसी तरह मैं खुद को काबू करती थी तारा मुझसे हमेशा पूछती थी कि कोई मिला या नहीं? पर मैं उसे हमेशा कहती हां रोज कोई ना कोई मिलता है बातें कर के समय काट लेती हूं
पर उधर मेरा वो दोस्त मुझसे मिलने और संभोग के लिये इतना उत्सुक हो चुका था कि वो किसी भी हद तक जाने को तैयार था मुझे वो रोज परेशान करने लगा तब मैंने यह बात तारा को बताई तारा ने मुझे पहले तो पूछा कि वो मुझे पसंद है या नहीं?
तो मैंने उसे हां कह दिया तब उसने कहा- अगर पसंद है तो मिल लो
उसने कहा- अगर मिलना चाहती हो तो तय कर लो बाकी तेरे घर से निकलने और मिलने का इन्तजाम मैं कर दूंगी
अब ये सब बातें सुन कर तो मैं हैरान हो गयी और दोनों से लगभग दो हफ्ते बात नहीं की
पर मेरे अंदर की वासना से मैं ज्यादा दिन बच ना सकी और एक दिन तारा से पूछ लिया कि क्या वो ऐसा कर सकती है कि हम मिल सकें और सब कुछ सुरक्षित तरीके से बिना किसी के शक कहीं मिल सकें?
उसने मुझे फिर समझाया कि अगर मैं तैयार हूं तो वो मेरे लिये सारा इन्तजाम कर देगी मुझे तो उस पर पूरा भरोसा था मैंने उस दोस्त को सन्देश भेज दिया कि मैं मिलना चाहती हूं
उसी रात हमने फिर बातें की और उनसे कह दिया कि जब मुझे मौका मिलेगा मैं उन्हें बुला लूंगी इधर तारा को सारी बात मैंने बता दी उसने कहा कि अगले हफ्ते का दिन तय कर लो मैं झारखण्ड आऊंगी और सब इंतज़ाम कर दूंगी
मैंने अपने दोस्त को भी फोन कर के अगले हफ्ते आने को कह दिया अगले हफ्ते बुधवार को तारा हमारे गांव आ गयी और शाम को मुझसे मिली हमने तय किया कि अगले दिन हम शहर जायेंगे
मेरे घर वाले तारा के साथ कहीं आने जाने से रोकते टोकते नहीं थे तो मुझे कोई चिंता नहीं थी बस शाम को अँधेरा होने से पहले मुझे घर लौटना था
अगले दिन हम सुबह 8 बजे घर से निकल गये और करीब नौ बजे शहर पहुंच गये रास्ते भर मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था यह सोच कर कि क्या होगा ऐसे किसी इंसान के साथ जिससे मैं पहले कभी मिली नहीं
मुझे अभी तक नहीं पता था कि तारा ने क्या इंतज़ाम कर रखा है पहले तो वो मुझे एक होटल में ले गयी पर मुझे बहुत डर लगा मैंने इन्कार कर दिया
फिर उसने बताया कि वो इसी होटल में है और हम अलग कमरा लेंगे हम वह अंदर गये और हमने कमरा ले लिया यह कहकर कि तबियत खराब है थोड़ा फ्रेश होने के लिये कुछ देर के लिये चाहिये कमरा
दो औरत 40 बरस के ऊपर सोच उनको ज्यादा परेशानी नहीं हुई और हम कमरे में चले गये कमरे में जाते ही तारा ने मुझे कहा कि उसको फोन कर बुला लो हमारे कमरे में
मैंने थोड़ा हिचकते हुये फोन किया और उन्हें हमारे कमरे में आने को कहा 10 मिनट के बाद दरवाजा खटखटाने की आवाज आई तारा ने दरवाजा खोला तो सामने एक लम्बा सा 60 साल का मर्द खड़ा था
उसने अपनी पहचान बताई और तारा ने उसे अंदर बुला लिया वो मुझे देख कर मुस्कुराया और मैं भी दिल के धड़कनों को काबू में करते हुये मुस्कुरा दी
हम बेड पर बैठ कर बातें करने लगे मैंने उस दोस्त को बस यही बताया था कि तारा मेरी सबसे अच्छी दोस्त है और उसको बस इतना बताया है कि वो मुझे प्यार करता है और मिलना चाहता था बाकी असल बात क्या है मेरे और तारा के बीच थी और उनके और मेरे बीच
मैंने उनको देखा वो चेहरे से कुछ ज्यादा उम्रदराज नहीं लग रहे थे उनका बदन भी इतना सुडौल था कि कोई भी एक नजर में कह सकता था कि ये फौज के बड़े अफसर होंगे
बाकी कहानी hindi sex story के अगले भाग में
Antarvasna Sex Stories :- काम वासना की आग- 1