आप ने antarvasna sex stories के पिछले भाग में पढ़ा जैसे ही मेरे मित्र का सख्त लंड रमा जी की चूत में घुसा मित्र को जरूर सुकून मिला होगा तभी उन्होंने भी बहुत ही जोर से रमा के चूतड़ों को दबाते हुये नीचे से अपनी कमर उठाना आरम्भ कर दिया था अब आप antarvasna sex stories में आगे पढ़े
Antarvasna Sex Stories 8
रमा जी ने फिर से तभी अपने चूतड़ों को थोड़ा उठाया जिससे मेरे मित्र भी अगले धक्के के लिये तैयार हो गये फिर क्या था जैसे ही रमा ने धक्का ऊपर से लगाया उन्हें भी नीचे से एक धक्का लगा
अब दोनों ही काफ़ी गरम जोशी में दिख रहे थे थोड़ी ही देर में दोनों ने ताल से ताल मिलाना शुरू कर दिया रमा जी जैसे जैसे ऊपर से धक्के मारतीं वैसे वैसे नीचे से मेरे मित्र अपनी कमर उचका कर उनके धक्के का जवाब देते
दोनों ही बड़ी गर्मजोशी से एक दूसरे में खोने लगे थे दोनों धक्कों के साथ एक दूसरे को कभी चूमते तो कभी काटते जा रहे थे कभी रमा अपने होंठों का रस चुसातीं तो कभी अपने मम्मों से दूध पिलातीं हालांकि रमा जी के मम्मों में दूध नहीं आता था
पर फिर भी वो दोनों जोश में ऐसी हरकतें कर रहे थे उधर बबिता जी ऐसे सिसकियां ले रही थीं जैसे उनकी जान निकलने वाली है रामावतार जी भी पूरे जोरों से हांफ हांफ कर धक्के मार रहे थे
उन दोनों की मादक सिसकारियां निकल रही थीं लंड और चूत के मिलन से थप थप और चप चप की आवाजें निकल रही थीं
यही हाल रमा और मेरे मित्र के संभोग का था इधर मैं उन्हें देख कर गर्म होने लगी थी और उधर कांतिलाल जी को अमृता फिर से गर्म कर रही थीं
विनोद और शालू थोड़े सामान्य हुये शालू उठ कर बबिता और रामावतार जी के पास चली गयी और रामावतार के गाल पर चुम्बन देते हुये शालू बबिता जी के मम्में को सहलाते हुये बोली हाय कितनी बेरहमी से चोद रहे हो कुछ तो रहम करो
रामावतार जी ने भी धक्के लगाते हुये कहा- इसके बाद तुम्हारी बारी है जानेमन
इसके जवाब में शालू हंसती हुयी बोली- पेशाब करके आती हूं मेरे आने से पहले मत झड़ जाना
ये कहते हुये शालू चली गयी और रामावतार जी बबिता की चूत में धक्के मारते रहे बबिता जी की सिसकारियों ने और जोर पकड़ना शुरू कर दिया था अब वो झड़ने के करीब आ गयी थीं
उनकी चरम पर आने की हरकतें रामावतार जी को और उकसाने लगी थीं कुछ ही पलों में बबिता जी की चूत से रस की धारा तेज़ी से निकलने लगी थी जो रामावतार जी के अन्डकोषों से लग कर बूंद बूंद टपकने लगी थी
वो दोनों पसीने पसीने हो चुके थे और बबिता जी का पानी उनके चूतड़ों के बीच के घाट और रामावतार जी के अन्डकोषों और जांघों से बहने लगा था
तभी बबिता जी ने एक झटके में मेज छोड़ रामावतार जी के हाथों को कस कर पकड़ लिया बबिता जी जोर जोर से सांसें लेने लगीं और हांफते हुये बड़बड़ाने लगीं
ह्म्म्म्म अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह तेज़ और जोर से मारो ऊपर ऊपर की तरफ लंड मारो हां आह्ह उम्म्ह अहह हय याह मेरी बच्चेदानी तक पेलो रुको मत चोदते रहो
ये सारी बातें किसी मर्द को उकसाने के लिये बहुत होती हैं और यही हुआ भी रामावतार जी ने बबिता के चूतड़ों को पकड़ते हुये उन्हें थोड़ा ऊपर को उठाया और इतनी तेज़ी से धक्का मारने लगे जैसे उनकी मर्दानगी को किसी ने चुनौती दे दी हो
बबिता जी और जोरों से बड़बड़ाने लगीं आह्ह और तेज़ी से चोदो मुझे और तेज़ और तेज़ आह्ह्ह्ह्ह म्म्म्म्म ऊऊ मां
तभी अचानक बबिता जी उठ बैठीं और रामावतार जी के गले में हाथ डाल कर खुद को उनसे चिपका लिया साथ ही अपनी जांघों से उनको जकड़ लिया
रामावतार जी ने भी उन्हें सहारा दिया पर धक्कों की ना तो तेजी में ना ही जोर में कोई कमी आने दी
बबिता जी अपनी कमर को घुमाने लगीं और ह्म्म्म ह्म्म्म आह्ह्ह आह्ह्ह करते हुये झड़ने लगीं अभी बबिता जी शांत होतीं उससे पहले ही रामावतार जी भी पूरी ताकत झोंकते हुये उनकी चूत में अपना तपता हुआ लावा उगलने लगे
वो दोनों एक दूसरे से चिपके हुये थे बस दोनों की कमर हिल रही थीं फिर धीरे धीरे उनका भी हिलना शांत हो गया अब दोनों झड़ चुके थे पर अब भी साथ में चिपक कर लगे हुये थे
तभी शालू आयी और रामावतार जी के चूतड़ पर थपकी देती हुये बोली मेरे आने से पहले ही झड़ गये?
रामावतार जी ने अलग होते हुये जवाब दिया- अभी तो काफ़ी समय है दोबारा तुम्हारे लिये भी तैयार हो जाऊंगा बेबी
बबिता जी की आंखें संतुष्टि से भरी हुयी दिख रही थीं उन्होंने शालू से मुस्कुराते हुये कपड़ा मांगा और अपनी चूत साफ करने लगीं
मैं आशा करती हूं कि मेरी इस antarvasna sex stories को पढ़ कर आप सभी को मज़ा आया होगा अब मैं आगे आपको एक और antarvasna sex stories बताने जा रही हूं जो पहले के जैसी आम जीवन की है मगर सबसे छुपी थी
आज इसे मैं आप सबसे साझा करने जा रही हूं कहते हैं कि लोग जिस प्रवृति के होते हैं उन्हें उन्हीं के जैसे लोग मिलते हैं या दोस्ती होती है ये बात माइक तारा और मुनीर के मिलन के बाद की है इनके बारे में आप ने मेरी पिछली कहानी में पढ़ा होगा
अब मैं आपको अपनी आगे एक और antarvasna sex stories बताने जा रही हूं जो मैं इस antarvasna sex stories से आगे शुरू कर रही हूं आपको यह मेरी antarvasna sex stories पढ़कर मज़ा आयेगा अब मैं अपनी hindi sex story शुरू करती हूं
मेरी जेठानी अड़ियल तरह से मुझसे व्यवहार करने लगी थी और मैं भी कुछ नहीं कर सकती थी क्योंकि ना तो मुझे पता था कि वो ऐसा किस वजह से कर रही थी ना ही हमारे घर में कोई बड़ों से बहस करता था
मुझे अपनी गलती का एहसास था उस वजह से मैं चुपचाप उनकी जली कटी बातें सुन लेती थी अब मुझे उस घर में रहना बिल्कुल पसंद नहीं था तो इसी वजह से मैंने अपने पति से बात की कि कब तक सब साथ रहेंगे?
हमारे बच्चे बड़े हो रहे हैं और हम सबके तरह साथ रहें ये जरूरी नहीं है अब जमाना बदल रहा है और बच्चों को अपनी अपनी एकांतता की आवश्यकता पड़ेगी पर बंटवारे की बात पति को हजम नहीं हुयी और वे उल्टा मुझ पर क्रोध जताने लगे
अब तक मेरे पति ने बहुत तरक्की कर ली थी उन्होंने धनबाद में ही अपना व्यापार शुरू कर लिया था खुद का ठेका ले लिया था इस वजह से वो वहीं रहने लगे थे और 3-4 हफ्ते में आते और राशन पानी की व्यवस्था करके चले जाते
बड़े लड़के ने रोज दिन कालेज आने के झंझट से शहर में ही किराये पे कमरा लेकर रहना शुरू कर दिया और हर हफ्ते में आ जाता था छोटे ने भी एक दिन तय कर लिया कि वो भी शहर में रहेगा आखिर आज के बच्चों को कहां गांव में रहने की इच्छा होती है
फिर पति ने उसकी भी व्यवस्था शहर में करा दी इस सबके बाद अब मैं अकेली रह गयी दिन भर बहुत बेकार सा लगने लगा था मैं ज्यादातर उस वयस्क साइट पर समय बिताने लगी
अब रात तो रात दिन में भी कई दंपति मित्र मुझे अपनी संभोग क्रिया कैमरे पर दिखाने लगे इस तरह मेरा मन व्याकुल होने लगा पर दुविधा ये थी कि मैं अब यहां और जोखिम नहीं उठा सकती थी
पति कभी आते भी तो संभोग में उनकी रूचि नकारात्मक थी कभी मन भी हुआ तो ना किसी तरह का खेल ना आलिंगन ना कुछ बस मेरी साड़ी उठायी धक्के दिये और बस सो गये मैं अधूरी प्यास अपनी समेटे सोने का प्रयास करती रह जाती
मेरी वासना की आग दिन ब दिन बढ़ती जाती और मेरे पास उपाय के नाम पर केवल हस्तमैथुन ही रह जाता एक रात मैंने पति से आखिरकार कह दिया क्यों ना आप अपनी कमजोरी के बारे में किसी डॉक्टर को दिखा लेते?
इस बात पर पति इतने क्रोधित हो गये और कहने लगे इतने साल में इस उम्र में तुम्हें अब कमी दिख रही है दो बच्चे क्या ऐसे ही हो गये?
उन्होंने मुझे उल्टा पुल्टा बहुत सुनाया फिर उस रात मेरी हर तरह की इच्छा ही खत्म हो गयी अकेले मन नहीं लगता था और शारीरिक इच्छाएं परेशान करने लग गयी थी इसी वजह से मैंने ठानी कि अब अपना मन कहीं और लगाना है
मैंने पति से बात की कि मुझे भी अपने साथ धनबाद में रख लो पति शुरू में तैयार नहीं हुये फिर बहुत जिद करने पर वो राजी हो गये
अपने कमरे में ताला लगा कर एक दिन मैं अपने पति के साथ नयी जगह चली आयी नया मकान देख दिल खुश हो गया पति ने घर की लगभग सारी व्यवस्था कर ली थी
2 कमरे 2 शौचालय एक हॉल एक रसोईघर एक बालकनी सब था गांव से भी बहुत सारा सामान साथ ले आये थे सब जमा लिया
एक रात पतिदेव खाने के समय बताने लगे कि उन्होंने बच्चों के लिये सब व्यवस्था कर दी है बाकी अगर सब सही रहा तो पास के कॉलोनी में एक घर भी खरीद लेंगे तब तक इस किराये के घर में रह लेते हैं
मुझे उनकी योजना बहुत अच्छी लगी कि कुछ भी है घर और परिवार के लिये इतना सोचते तो हैं मेरे दिन अच्छे गुजरने लगे थे पहले की भांति पति अब मेरी बात सुनते थे
केवल कमी शारीरिक संबंधों की थी जो पति नहीं देते थे और ना उन्हें कुछ ज्यादा रूचि थी मैं दोबारा उनसे कुछ नहीं पूछना चाहती थी चूंकि हमारा समाज रूढ़िवादी है और एक समय के बाद कामक्रीड़ा को अपराध की तरह देखता है
मेरे पति भी उन्हीं में से एक थे हालांकि उनकी कभी इच्छा हुयी तो मर्द होने के नाते संभोग करना अपना अधिकार समझते थे
यह समाज की दोगली मनोवृत्ति है और मेरे पति में भी ये स्वाभाविक रूप से होना तय थी पर मैं कुछ अलग हूं पति के साथ इधर रहते हुये महीना भर होने को आया तो अगल बगल एक दो औरतों के साथ जान पहचान भी हो गयी
पर वो सभी सामाजिक बंधनों में जीने वाली महिलाएं थीं हाथ में महंगा समार्टफोन तो था मगर गूगल वॉटसएप्प और यूट्यूब से आगे कोई बढ़ा ही नहीं
मैं भी उनसे ज्यादा नहीं बातें करती थी क्योंकि जब कोई बात छिड़े तो किसी ना किसी की बुराई या बढ़ाई के अलावा कुछ नहीं था
पति के होने की वजह से मैं ज्यादा वयस्क साइट पर नहीं जा पाती थी मगर जब कभी मौका मिलता तो खोल लेती तो पुराने और नये मित्रों से ढेरों संदेश मिलते किसी को उत्तर देती किसी को नहीं
अब मैंने सोच लिया था कि अब और कुछ नहीं करना है इसी बीच पतिदेव ने रामगढ़ के पास भी कुछ ठेका ले लिया और हफ्ते में एक दो बार वहां जाने लगे समय बीतने के साथ उनका काम बढ़ता गया तो हफ्ते के 2 से 3 दिन उधर ही बिताने लगे
जब वो नहीं होते तो फिर मेरा मन उस साइट की ओर खिंच जाता फिर क्या था मेरी जिज्ञासाएं फिर से बढ़ने लगीं इसी बीच एक दिन मैं नीचे दूध लाने गयी तो देखा कि जिस दुकान से दूध लाती थी वो बन्द थी
दूध तो लेना ही था तो मैं बगल की दुकान में चली गयी सामने देखा तो बहुत ही आकर्षक मर्द दुकान में बैठा था लंबा चौड़ा गोरा सिर पर पगड़ी और चेहरे पर दाड़ी मूंछें थीं ये एक सरदार था
जिसकी उम्र मेरे ख्याल से 50 साल की होगी पर वो हट्टा कट्टा और बहुत आकर्षक था मैंने उनसे दूध की थैली मांगी तो शुरू में बिना मुझे देखे सरदारजी थैली लाने चले गये पर जब वापस आये और मैंने पैसे दिये तो उनकी नजर मेरी नजर से टकराई
तो वो मुझे देखते रह गये एकटक मुझे देखने के बाद उन्होंने पैसे लौटाये और मैं वापस चली आयी मेरे दिमाग में तो उस वक़्त कुछ नहीं था पर वो इंसान मुझे केवल आकर्षक लगा था
उस दिन तो कुछ खास अनुभव नहीं लगा कुछ भी पर अगले दिन पता नहीं क्यों मैं उसी की दुकान में चली गयी पर आज भी मन में सब कुछ सामान्य था पहले दिन की तरह कुछ नहीं लगा
उसने दूध दिया मैंने लिया और चली आयी ऐसा ही लगभग 10-12 रोज हुआ मैं रोज वहीं से दूध लेने लगी थी फिर एक दिन देखा कि दुकान पर वो आदमी नहीं था उसकी जगह पर एक 38-40 साल की हष्ट पुष्ट महिला बैठी थी
वो सलवार कमीज में एकदम चट चट गोरी सुडौल स्तन गोल मांसल मोटे मोटे चूतड़ चूड़ीदार पाजामे में मोटी मोटी जांघें थीं वो बहुत आकर्षक लग रही थी
उसका गोल चेहरा लंबी नाक गुलाबी होंठ ऐसा लग रहा था मानो कोई पहाड़ी कश्मीरी महिला हो जिसे देख किसी भी मर्द का मन मचल उठे आसानी से कोई उसकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकता था
मैंने उनसे दूध मांगा फिर जब पैसे दिये तो मैंने 2000 का नोट दिया उस महिला ने मुझे खुले पैसे देने को कहा मैंने कहा कि खुके नहीं हैं
फिर उसने मुझसे कहा कि आज उनके पति नहीं हैं और उनके पास भी 2000 के खुले नहीं हैं मैं बिना दूध लिये वापस जाने लगी तभी उसने मुझे आवाज दी और पूछा कि क्या आप यहीं रहती हैं?
मैंने उत्तर दिया- हां सामने वाली इमारत के तीसरे माले में रहती हूं
उसने फिर मुझसे कहा- आप लगता है नयी आयी हो यहां?
मैंने कहा- हां अभी कुछ ही दिन हुये यहां आये और अब यही रहेंगे
उसने मुझसे कहा- अगर आप रोज दूध लेती हैं तो ले जाइए बाद में पैसे दे देना
इस प्रकार हमारी जान पहचान शुरू हुयी और उसी शाम सब्जी लेने बाहर निकली तो लौटते समय उससे दोबारा बातचीत हुयी
मैंने उससे बात करते हुये देखा कि ज्यादातर वो मोबाइल में ही व्यस्त रहती थी खैर जो भी हो वो मुझे मोहल्ले की बाकी औरतों से थोड़ी अलग लगी इसलिये उससे मेरी अच्छी बन रही थी
अगले दिन फिर दूध लाने गयी तो सरदार जी सामने थे दूध के पैसे देते समय मैंने पिछला उधार भी ले लेने को कहा तो हंसते हुये मुझसे मेरा परिचय लेने लग गये
इसी तरह रोज दिन में दोनों दंपत्ती से हल्की फुल्की बातें होने लगीं उस महिला का काल्पनिक नाम प्रीति है जबकी उसके पति का नाम सुखबीर है
प्रीति का मायका जम्मू है और सुखबीर यहीं झारखंड से है मगर उसके पूर्वज पंजाब से थे वो सिख रेजिमेंट रामगढ़ जिले में सिपाही था और अब रिटायर्ड होकर यहीं अपनी दुकान से जीवन यापन कर रहा था
दुकान छोटी मोटी नहीं थी बल्कि उसकी दुकान से और भी बड़े व्यापार जुड़े थे प्रीति से बात करते हुये पता चला कि वो 45 साल की है और उसकी 2 बेटियां हैं उन दोनों का विवाह हो चुका था और अपने अपने ससुराल में हैं
प्रीति की बात से यकीन नहीं हुआ कि वो इतनी उम्र की है उसने आगे बताया कि उसकी शादी 19 साल में ही हो गयी थी और एक साल के बाद पहली लड़की हुयी फिर डेढ़ साल के बाद दूसरी लड़की हुयी
बाकी कहानी hindi sex story के अगले भाग में
Antarvasna Sex Stories :- काम वासना की आग- 9