आप ने antarvasna sex stories के पिछले भाग में पढ़ा मैंने पलट कर अपना पल्लू वापस उठाने का प्रयास किया तो मेरे पुराने वाले मित्र ने मेरा हाथ पकड़ कहा इन खूबसूरत मम्मों को क्यों छुपा रही हो? अब आप antarvasna sex stories में आगे पढ़े
Antarvasna Sex Stories 6
मेरे ब्लाउज से मेरे अधनंगे मम्में दिख रहे थे और सबकी निगाहें मेरे मम्मों पर थीं तभी अमृता और रमा जी मेरे सामने खड़े हो गये और मेरे मम्मों की बराबरी अपने से करने लगीं
अमृता बिलकुल किसी गोरी अंग्रेज की तरह ही गोरी लम्बी और सुंदर थी उसके मम्में करीब 36 इंच के एकदम सुडौल थे उसके कूल्हे भी उठे हुये थे चूत के बाल साफ किये हुये थे जिस वजह से उसकी चूत फूली हुयी और एकदम चमकती हुयी दिख रही थी
उसकी चूत के द्वार पर संभोग की वजह से पानी सा लगा था जिससे ये अंदाज़ा हो रहा था कि उसकी चूत अभी भी गीली थी
यही हाल रमा जी का भी था उनकी चूत पर भी पानी सा था और उनकी चूत की दोनों पंखुड़िया बाहर की ओर लटकी सी थीं उनकी चूत पर हल्के काले बाल थे जो कि छंटाई किये हुये थे
उनके मम्में अमृता से बड़े और गेहुंए रंग के थे और उन पर बड़े बड़े निपल थे तभी बातें करते हुये रमा जी मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगी उन्होंने एक एक करके मेरे ब्लाउज और ब्रा खोल कर अलग कर दिया
इसके बाद क्या था कांतिलाल जी ने मेरे मम्मों को पीछे से दबाते हुये मुझे बिस्तर पर खींच लिया और मुझे अपने ऊपर पीठ के बल लिटा कर मेरे गर्दन और गालों का चुब्बन शुरू कर दिया
पता नहीं मुझे अजीब सा लग रहा था फिर भी मैं विरोध नहीं कर रही थी कांतिलाल जब मेरे मम्मों को दबाते हुये मुझे चूम रहे थे
तब अमृता ने मेरी साड़ी खींच कर खोल दी थी और पेटीकोट का नाड़ा भी खोल कर उसे खींचते हुये निकाल कर दूर फेंक दिया था
अचानक मैंने देखा के मेरी बाई ओर विनोद आ गिरा और उसके ऊपर शालू चढ़ गयी शालू जोरों से होंठों को होंठों से लगाकर चूमने लगी
विनोद तो पहले से नंगा था सो विनोद धीरे धीरे शालू को चूमते हुये उसके कपड़े उतारने लगा और कुछ ही पलों में शालू भी नंगी हो गयी इधर कांतिलाल जी के हाथों की पकड़ और भी मजबूत सा लगने लगी थी
मुझे और मेरे कूल्हों के बीच उनका तना हुआ लंड मुझे चुभता सा महसूस हो रहा था तभी मेरी जांघों पर किसी के गरम हाथों का स्पर्श हुआ मैंने अपना सर थोड़ा ऊपर करके देखा तो मेरा वो पुराना दोस्त मेरी ओर मुस्कुराता हुआ मेरी चूत को पैंटी के ऊपर से चूमने लगा
उसकी नज़रें मेरी ओर थीं और होंठ मेरी चूत के ऊपर थे अचानक उन्होंने मेरी पैंटी को पकड़ एक झटके में खींच का निकाल दिया और मुझे पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया
इसके तुरंत बाद ही उन्होंने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया इधर कांतिलाल जी मुझे जोरों से पकड़े हुये अपने ऊपर लिटाए थे और मेरे मम्मों को बेरहमी से मसलते हुये मेरी गर्दन कंधों पर चुम्बनों की बरसात किये जा रहे थे
मेरे पुराने मित्र की मेरी चूत में घूमती हुयी जुबान मुझे बेचैन सी करने लगी मेरे बदन में गर्मी सी आने लगी और चूत गीली ही होती चली जा रही थी
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी इंसान पर किसी बुरी आत्मा का साया हावी होता चला जाता है वैसे ही मेरे बदन पर वासना का साया हावी होता जा रहा हो
अब तो मुझे यूं लगने लगा कि मैं अब वासना के अधीन होती जा रही हूं मेरी बैचैन इतनी बढ़ गयी कि मैं पूरी ताकत लगा कर कांतिलाल जी की बांहों से आजाद हो उठ बैठी
वो लोग एकाएक मुझे देखने लगे शायद उन्हें लगा होगा कि मुझे ये पसंद नहीं आया मैंने कुछ पलों के लिये सांस ली तो सामने देखा रामावतार जी कुर्सी पर बैठे हुये थे और उनका लंड रमा जी पकड़े हुये थीं
उनके बगल में बबिता जी भी खड़ी थीं वो लोग सभी मुझे आश्चर्य से देख रही थीं तभी मैंने अपने उस दोस्त को पकड़ा और होंठों से होंठ लगा उन्हें चूमने लगी
ये देख सभी को थोड़ी राहत सी मिली और फिर से सब अपने अपने कामों में लग गये मेरे चूमने की स्थिति देखते ही कांतिलाल जी उठ कर फिर से मेरे पीछे से मेरे मम्मों से खेलने और मुझे चूमने लगे
मैंने चोर नजरों से कमरे का नजारा देखने की सोची फिर हल्के से आंखों को खोल कर देखा तो हमारे ठीक सामने रामावतार जी वैसे ही कुर्सी पर बैठे थे और रमा जी उनका लंड चूसने के साथ सहला भी रही थी
वो जमीन पर घुटनों के बल खड़ी हुयी थीं बबिता रामावतार जी के होंठों से होंठों को लगा चुम्बन कर रही थीं इस वासना के खुले खेल को देख कर मेरी कामोत्तेजना और बढ़ गयी थी
चुम्बन के दौरान रामावतार जी के दोनों हाथ बबिता के साड़ी के अंदर थे और वो उनके चूतड़ों को दबा और सहला रहे थे
कुछ पलों के चुम्बन और चूसने की क्रिया के बाद बबिता अलग हुयी और अपनी साड़ी उठा कर उसने अपनी पैंटी उतार दी बबिता ने अपनी साड़ी को कमर तक उठाया और अपनी एक टांग को कुर्सी के ऊपर रख कर अपनी चूत खोल दी
बस फिर क्या था रामावतार जी ने दोनों हाथों से बबिता की जांघों को पकड़ा और उसकी चूत को चाटने लगे
इधर जब मैंने नजर घुमाई तो देखा कि शालू विनोद के लंड के ऊपर उछल रही थी और विनोद उसके मम्मों को दबाते हुये खुद भी अपनी कमर उठा कर शालू के धक्कों का जवाब दे रहा था
विनोद और शालू को देख कर मेरा तो अब ध्यान बंट सा गया था मेरा शरीर एक तरफ तो पूरी तरह कामोत्तेजित था पर मन उत्तेजना के साथ उत्सुक भी था क्योंकि जो अब तक सिर्फ तारा से सुना था और व्यस्क फिल्मों में देखा था वो सब कुछ मेरी आंखों के सामने था
अब तक सामूहिक संभोग बस जान पहचान में सुना था पर यहां तो मेरे लिये एक को छोड़ सभी अजनबी थे हालांकि ऐसा पहली बार नहीं था कि किसी अजनबी से मैंने पहली बार संभोग किया हो या समूह में पहली बार संभोग किया हो
पर अभी मैं ऐसे माहौल में थी जहां बस लोग इसलिये मिले थे कि एक दूसरे के बदन का स्वाद ले सकें शायद मुझे भी लगने लगा था कि जैसे हर खाने का स्वाद अलग होता है वैसे ही अलग अलग जिस्मों का स्वाद भी अलग होता है
मैं एक तरफ तो संभोग का आनन्द लेना चाह रही थी वहीं मेरे मन और मस्तिष्क में दूसरों को संभोग रत देखने की भी लालसा भी थी
इधर जो मेरे तन बदन में खलबली मची थी उसके लिये भी मैं बेचैन हुयी जा रही थी मेरे जिस्म के साथ ये पहली बार था कि दो मर्द एक साथ खेल रहे थे
ये मेरी उत्तेजना को और भी बढ़ा रही थी पता नहीं मेरे दिमाग में क्या आया जैसे कोई बिजली की रफ़्तार से उपाय सा आया और मैं अपने दोस्त को धक्का दे अलग होकर कांतिलाल की तरफ पलट गयी और उन पर टूट सी पड़ी
मैंने उनको धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और उनके ऊपर चढ़ बैठी मैं उनके ऊपर झुक कर उनके होंठों से होंठों को लगा कर चूसने लगी और फिर क्या था वे भी मेरे मांसल चूतड़ों मसलते हुये मेरा साथ होंठों से देने लगे
मुझे उनका तना हुआ लंड मेरी चूत के इर्द गिर्द चुभता सा महसूस हो रहा था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे छूते हुये कर अपने अंदर घुसने के रास्ते की तलाश कर रहा हो
मेरे दिमाग में तो अब दोहरी नीति शुरू हो गयी थी मैं अब सबको देखना चाहती थी मैंने अपनी चाल चलनी शुरू कर दी मैं यह बात तो समझ रही थी कि सभी लोग यहां जिस्मों का मजा लेने आए थे
पर उनके दिमाग में मेरी छवि कुछ और थी और मैं वो छवि बरकरार रखना चाहती थी बस ये सारी बातें सोचते हुये मैंने अपने बाएँ हाथ से कांतिलाल जी के लंड को पकड़ा और अपनी कमर ऊपर उठा कर लंड को अपनी चूत की छेद पर थोड़ा रगड़ दिया
बस फिर क्या था उनका सुपारा तो पहले से लपलपा रहा था इधर मेरी चूत बुरी तरह गीली होने के कारण सुपाड़ा चिकनाई से और भी गीला हो गया
मैंने लंड को थोड़ा सीधा पकड़ते हुये चूत की छेद के तरफ दिशा दी और अपनी कमर को धीरे धीरे दबाने लगी अगले ही पल उनका सुपाड़ा पूरी तरह मेरी चूत के भीतर समा चुका था
उनका लंड पूरी तरह सख्त था सो मैंने अपना हाथ हटा उनको दोनों हाथों से जकड़ लिया और अपनी कमर लंड पर दबाती चली गयी
कांतिलाल जी का लंड अब तक आधा घुसा था उन्होंने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को पूरी ताकत से पकड़ा और नीचे से अपनी कमर जोर से उचका दिया
उनका कड़क लंड सटाक से मेरी चूत में घुसता हुआ सीधा मेरे बच्चेदानी में लगा अगले ही पल मेरे मुंह से उम्म्ह अहह हय याह की आवाज कराह के साथ निकल पड़ी
उनका लंड बहुत ही ज्यादा सख्त था और गरम महसूस हो रहा था मुझे लगा कि वो जल्दी ही झड़ जाएंगे पर मैं उनके साथ पहली बार संभोग कर रही थी सो कुछ भी अंदाजा लगाना मुश्किल था
मैं अब सब कुछ भूल कर उनके ऊपर अपनी कमर उचकाने लगी और उनका लंड मेरी चूत में अंदर बाहर होता हुआ मेरी चूत की दीवारों से रगड़ खाने लगा
मैं तो वैसे ही बहुत उत्तेजित थी और उनका भी जोश देख बहुत सुखद आनन्द महसूस कर रही थी कुछ पलों के धक्कों के बाद कांतिलाल जी ने भी नीचे से पूरा जोर लगाना शुरू कर दिया
हम दोनों की कमर इस प्रकार हिल रही थीं जैसे एक दूसरे से ताल मिला रही हों इस ताल मेल में मुझे सच में बहुत मजा आने लगा था
हम दोनों का हर पल जोश बढ़ता ही जा रहा था और धक्कों की गति तेजी से बढ़ती ही जा रही थी हमें धक्के लगाते हुये करीब 10 मिनट होने चले थे और हम एक दूसरे के होंठों को चूमते चूसते चूतड़ों को दबाते मसलते मजा ले रहे थे
वो मेरा एक दूध चूसते और काटते हुये धक्के लगाए जा रहे थे मुझे उनका लंड और उनका जोश वाकयी बहुत मजा दे रहा था उनके धक्के कभी कभी मेरी बच्चेदानी में जोर का चोट देते
जिससे मैं एक मीठे दर्द के साथ कराह लेती और रुक जाती और फिर धक्के लगाने लगती मैं इधर मजे में सिसकते हुये कराह रही थी और वो उधर लम्बी लम्बी सांसें लेते हुये मेरे जिस्म का मजा ले रहे थे
कुछ मिनट के बाद मेरा पूरा बदन गरम हो कर पसीना छोड़ने लगा और मेरे सर सीने जांघों के किनारों से पसीना बहने लगा मेरी चूत पानी पानी हो चली थी और पानी रिसने सा लगा था जो पसीने से मिलकर उनके लंड को तर कर रहा था
फिर धक्कों के साथ फच फच की आवाजें आने लगीं मैं अब थकान महसूस करने लगी थी उनके धक्कों के सामने मेरे धक्के ढीले पड़ने लगे
वो भी काफी अनुभवी थे और जब इस तरह का जोश हो तो कोई मौका नहीं छोड़ना नहीं चाहता सो उन्होंने सटाक से मुझे बिस्तर पर पलट दिया और मेरे ऊपर से उठ गये
मुझे तो पूर्ण संतुष्टि चाहिए थी तो मैं उनके यूं उठ जाने से एक पल के लिये बहुत ही झुंझका सी गयी पर उन्होंने तुरंत तकिया लिया और मुझे कुतिया बन जाने का इशारा किया
मैं भी बिना समय गंवाए पलट कर घुटनों के बल झुक गयी और अपने चूतड़ों को उठा दिया उन्होंने तकिया मेरे पेट के नीचे लगा दिया और मैं तकिये के सहारे झुक कर कुतिया बन गयी
वो मेरे पीछे घुटनों के बल खड़े हो गये और उन्होंने अपने लंड को बिना किसी देरी के मेरी चूत में घुसा दिया अब वो मेरी कमर पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाने लगे
इस स्थिति में उनके धक्के काफी तेज़ और जोरदार लग रहे थे क्योंकि उनके पास अपनी कमर घुमाने की पूरी आजादी थी मैं तो इतनी जोश में थी कि उनका हर धक्का मुझे और भी ज्यादा मजा दे रहा था
करीब 10 मिनट ऐसे ही धक्के लगाने के बाद तो मुझे अंधेरा सा दिखने लगा मेरी सांसें तेज़ होने लगीं मैं हांफने और सिसकारने लगी
अब मैं झड़ने वाली थी तभी कांतिलाल जी मेरे ऊपर झुक गये और चूतड़ों को छोड़ मेरे मम्मों को दबोचते हुये धक्के मारने लगे
2 मिनट के धक्कों के बाद उन्होंने मेरा एक मम्मां छोड़ मेरी कमर पकड़ कर अपनी ओर खींची मैं उनका इशारा समझ गयी कि वे मुझे अपनी कूल्हे उठाने को कह रहे हैं ताकि मेरी चूत की और गहराई में उनका लंड जा सके
मैंने थोड़ा और उठा दिया और वो धक्के लगाने लगे मेरी तो जैसे जान निकलने जैसी हो रही थी क्योंकि अब मैं झड़ने वाली थी
बस 2-3 मिनट के धक्कों में ही मैंने कराहते हुये लम्बी लम्बी सांसें छोड़ते हुये अपने बदन को ऐंठते हुये पानी छोड़ना शुरू कर दिया
मैं झड़ते हुये अपने चूतड़ उनके लंड की तरफ तब तक उठाती रही जब तक कि मैं पूरी तरह झड़ ना गयी जब तक मैं सामान्य स्थिति में आती कांतिलाल जी धक्के भी लगाते ही रहे
मैं उसी अवस्था में उनके झड़ने का इंतज़ार करती रही मेरा पूरा बदन ढीला सा पड़ने लगा था पर उनके धक्कों की रफ़्तार और ताकत में कोई कमी नहीं थी
करीब 5 मिनट के धक्कों के बाद उनका लंड मेरी चूत के भीतर और भी गरम लगने लगा मैं समझ गयी कि अब इनका वक्त आ गया
फिर क्या था उम्म्म उम्म्म्म ओह्ह्ह्ह की आवाज करते हुये 8-10 जोरदार धक्कों के साथ उन्होंने मेरी चूत को अपने रस से भर दिया और 1-2 धीमे धक्कों के साथ मेरे ऊपर निढाल होकर हांफने लगे
कुछ पलों के बाद जब थोड़े शांत हुये तो हम अलग अलग होकर वहीं बिस्तर पर गिर गये
मैं अभी सुस्त हुयी ही थी कि मेरा वो पुराना मित्र अपने लंड को हाथों से हिलाता हुआ मेरी ओर बढ़ा उनका लंड पूरी तरह तनतनाया हुआ सीधा खड़ा था
मेरे पास आकर उन्होंने झुक कर मेरी टांगों को जांघों के पास से पकड़ कर अपनी और खींचा अब वो मेरे साथ संभोग करना चाहते थे
जाहिर है इतनी देर मुझे और बाकियों को संभोग में लिप्त देख कर उनकी भी उत्सुकता और उत्तेजना काफी बढ़ गयी होगी
तभी मैंने कहा- मैं थक गयी हूं थोड़ा आराम कर लेने दो
वो मेरी भावनाओं का ख्याल रखते हुये मुस्कुरा दिये और अब वे बबिता और रामावतार जी की तरफ बढ़ गये इधर कांतिलाल जी पूरे सुस्त पड़े थे अब मेरे पास बाकियों को देखने का पूरा मौका था तो मैं उठ कर बैठ गयी
मेरे ठीक सामने बबिता रामावतार जी और रमा जी थे वो नजारा सच में बहुत ही उत्तेजक था रमा कुर्सी पर हाथ रख कर आगे की ओर झुकी हुयी थी और रामावतार जी उसके चूतड़ों को पकड़ कर अपने लंड को रमा जी की चूत में घुसाए हुये जोर जोर से प्रहार किये जा रहे थे
बाकी कहानी hindi sex story के अगले भाग में
Antarvasna Sex Stories :- काम वासना की आग- 7