आप ने antarvasna sex stories के पिछले भाग में पढ़ा मुझे फिर याद आया कि उनका वीर्य मेरी चूत के भीतर से बह कर मेरी पैंटी गीली कर गया था इसी वजह से रास्ते भर मुझे मेरी पैंटी गीली गीली सी लग रही थी अब आप antarvasna sex stories में आगे पढ़े
Antarvasna Sex Stories 5
शायद जल्दबाजी में मैंने अपनी चूत ठीक से साफ़ नहीं की थी मैं मन ही मन मुस्कुराते हुये एक संतुष्टि की सांस लेते हुये लेट गयी और ना जाने कब मेरी आंख लग गयी
मैं अपने उस दोस्त से मिलकर काफी संतुष्ट थी और उनसे उस दिन के बाद भी याहू चैट पर बातें चलती रहीं हमारे मिलन को एक हफ़्ता गुजर चुका था और तारा भी वापस चली गयी थी
हम दोनों यूं ही चैटिंग के जरिये अपने मन की मंशा शब्दों के जरिये एक दूसरे को बताते रहे करीब 2 महीने बीतने के बाद उन्होंने फिर से मिलने की जिद शुरू कर दी
पर मेरे लिये ये मुमकिन नहीं था फिलहाल तारा जा चुकी थी और मैं कोई बहाना नहीं बना सकती थी क्योंकि मुझे किसी और पर भरोसा नहीं था
वो रोज मुझसे मिलने की बात करते पर मैं हमेशा बस कुछ बहाना बना कर टाल देती या उनको दिलासा देती मौका निकाल कर मिलूंगी
फिर एक दिन उन्होंने मुझे एक उपाय बताया शुरू में तो मुझे बड़ा अटपटा सा लगा फिर सोचा कि चलो इसी बहाने कुछ नया अनुभव होगा
उनके कुछ दोस्त एक व्यस्क दोस्तों को खोजने की साईट पर थे पहले तो उन्होंने मुझे एक दम्पति से वहां मिलवाया फिर एक लड़की जो जबलपुर की थी उससे मिलवाया
मैं उनसे बातें करने लगी और कुछ ही दिनों में दोस्ती भी हो गयी पर अब भी मुझे भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि मैंने किसी को देखा नहीं था
फिर एक दिन मेरे फोन पर एक सन्देश आया कि अगर मैं मिलना चाहती हूं तो वो लोग हजारीबाग आ जायेंगे
मैंने सन्देश से पूछा- कौन?
तो जवाब आया- मेरा नाम शालू है मैं आपसे मिलने के लिये आपको घर से ले सकती हूं
शालू और वो दम्पति एक दूसरे से जुड़े हुये थे मैं पहले तो सकपका गयी कि ये क्या हो रहा है क्योंकि मैं किसी मुसीबत में नहीं पड़ना चाहती थी
मैं रात का इंतज़ार करने लगी ताकि मैं उस दोस्त से बात करके सब सच जान सकूं रात के करीब 12 बजे हमारी बात शुरू हुयी मैंने सबसे पहले वही पूछा
तब उन्होंने बताया- आपका नंबर शालू को मैंने ही दिया था
मैं थोड़ा विचलित हो गयी
उन्होंने कहा- अगर आप राजी हों तो हम लोग आपसे आपके घर पर शालू को आपकी सहेली बना कर भेज सकते हैं वो आपको बाहर ले जा सकती है
मुझे पहले तो अटपटा सा लगा मैंने इंकार कर दिया क्योंकि इसमें बहुत खतरा था वो मेरे बारे में आखिर जानती क्या थी जो मुझे यहां से निकाल कर ले जाती मेरे पति को क्या जवाब देती अगर वे कोई सवाल करते तो?
मैंने साफ़ मना कर दिया पर वे लोग मुझे रोज ज़ोर देने लगे कभी कभी उनकी मादक इच्छाओं को देख मेरा भी मन होने लगता पर मुझे बहुत डर लगता
कुछ दिनों के बाद उस लड़की शालू का फिर से सन्देश आया और वो मुझे याहू पर बात समझाने लगी अपनी तरकीब बताने लगी
फिर उस दम्पति ने भी मुझे अपनी बातों में उलझाने का प्रयास शुरू कर दिया वो लोग मुझे रोज कहने लगे कि मैं बस अपनी मर्ज़ी हां बता दूं बाकी वो लोग तरकीब निकाल लेंगे
तभी मेरी जेठानी के पिता के मरने की खबर आयी और वो लोग सपरिवार चले गये अब घर में बस मैं मेरे बच्चे और देवर थे मुझे लगा कि ये सही मौका है मेरे लिये और मैंने हां कह दिया
उन्होंने अपनी सारी तरकीब मुझे बता दी और मैंने भी अपनी सारी बातें बता दीं ताकि कोई सवाल करे तो वो लोग सही जवाब दे सकें
उन्होंने दो दिन के बाद मुझे सन्देश भेजा कि वो लोग हजारीबाग में हैं और अगले दिन मेरे घर मुझे लेने वो दो औरतें आयेगी
मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा कि भगवान जाने क्या होगा मैंने वासना की आग में भूल कर ये क्या कर दिया कहीं किसी को शक हुआ तो क्या होगा
कहीं मेरी चोरी पकड़ी तो नहीं जायेगी बस यही सभी बातें सोचती हुयी मैं रात भर सोई नहीं सुबह करीब 4 बजे मेरी आंख लगी और रोज की आदत होने के वजह से 6 बजे उठ गयी मेरे दिमाग में बस उनकी ही बातें थीं
मैंने अब सोच लिया कि मैं उन्हें मना कर दूंगी करीब 9 बजे उनका फोन आया तब मैंने पहली बार उस जबलपुर वाली लड़की से बात की
उसने मुझसे कहा- मैं और एक और औरत तुम्हें लेने आ रही हैं तुम तैयार रहना
मैंने तुरंत जवाब दिया- मत आओ मुझे डर लग रहा है कहीं मेरी चोरी पकड़ी ना जाये
पर उन्होंने मुझे बहुत भरोसा दिया कि कुछ नहीं होगा वो सब कुछ संभाल लेंगी मैंने उनको बहुत समझाया पर वो नहीं मानी
तब मैंने तुरंत जा कर अपनी देवरानी को बताया मुझसे मिलने मेरी दो सहेलियां आ रही हैं हो सकता है कि मैं उनके साथ थोड़ा घूमने और बाज़ार करने शहर जाऊं क्या तुम चलोगी मेरे साथ?
मैं जानती थी कि बच्चों की वजह से वो बाहर नहीं जा सकती और घर पर वो अकेली भी है पर उसे शक ना हो इसलिये मैंने उससे जानबूझ कर साथ चलने के लिये कहा था
उसने कहा- दीदी अगर मैं भी चली जाउंगी तो घर पर कौन रहेगा और बच्चों को अकेला कौन देखेगा और आपके देवर भी काम पर चले जायेंगे
ये कह कर उसने मुझसे कहा- आप अकेली चली जाओ
मैंने कहा- जरूरी नहीं कि मैं जाऊं ही मैंने इसलिये कहा कि हो सकता है वो मुझे साथ चलने के लिये कहें इतना कह कर मैं अपने देवर के पास गयी और सारी बातें बता दीं
देवर ने कहा- भाभी घर पर बड़े भैया और भाभी नहीं हैं सो मैं कुछ नहीं कह सकता पर अगर जाओ तो शाम तक लौट आना
मैंने भी ज्यादा जोखिम ना उठाते हुये तुरंत जेठानी को फोन कर सारी बातें बता दीं तो उन्होंने शायद अपने घर की हालत देखते हुये ज्यादा बात नहीं की और इजाजत दे दी
ये सारी बातें मेरे लिये कुछ राहत भरी थीं और अब मैं बस उनका इंतज़ार करने लगी करीब 20 मिनट के बाद मेरा फोन बजा तो देखा कि शालू का फोन था
मैंने फोन उठाया तो उसने कहा- मैं आपके घर के पास ही हूं मुझे अपने घर का रास्ता बताओ
मैंने उससे पूछा- फिलहाल कहां हो?
मेरी मंशा थी कि मैं खुद जाकर उससे पहले बाहर मिल लूं मैं उसके बताई हुयी जगह पर जाने के लिये निकली और मैंने देवर से कहा मेरी सहेलियां बाहर खड़ी हैं मैं उन्हें लेकर आती हूं
मैं उनके बताई जगह पर गयी तो देखा एक कार खड़ी थी और कार से बाहर एक लड़की सलवार सूट में खड़ी थी शायद मुझे ढूंढ रही थी उसने मुझे देखते ही मेरा नाम लेकर मुझे पुकारा तो मैंने भी उसका नाम लिया
फिर हम एक दूसरे को पहचान गये मैं उनकी कार के पास गयी तो अंदर से एक और औरत जो बिल्कुल मेरी ही उम्र की थी बाहर आयी और मुझसे हाथ मिलाते हुये कहा बहुत सुना तुम्हारे बारे में
मेरा तो दिमाग ही काम नहीं कर रहा था फिर भी अपने दिल की धड़कनों को काबू में करती हुयी मैंने उन्हें घर आने को कहा रास्ते में वो मुझे कहती आयी कि मैं बिल्कुल ना डरूं बाकी वो लोग सब संभाल लेंगे
उन्होंने मुझे अपना परिचय दे दिया एक शालू थी जो करीब 32 साल की थी पर शादीशुदा नहीं थी दूसरी बबीता थी जिसके 2 बच्चे हैं और वो दिल्ली में रहती है
वो लोग यहां अपनी एक रिश्तेदार की शादी में आयी हुयी थीं उन्होंने पूरी कहानी गढ़ दी थी बस मुझे उस पर थोड़ा एक्टिंग करना था कार के ड्राईवर को वहीं गाड़ी में रहने दिया और मैं उन्हें लेकर घर आ गयी
बच्चे तो अब तक स्कूल चले गये थे और देवर बस निकलने ही वाले थे देवर के जाते जाते मैंने उन्हें मिलवा दिया और कहा ये लोग मुझे साथ शहर चलने को कह रही हैं
मेरे कहने के साथ ही वो दोनों मेरे देवर से विनती करने लगीं कि मुझे जाने दें शाम होने से पहले मुझे वापस छोड़ देंगे इस पर देवर ने हां कह दिया और चले गये
मैंने उन्हें बिठाया चाय नाश्ता दिया फिर मैंने देवरानी को उनके सामने बातचीत करने को बिठा दिया और मैं अपने कमरे में तैयार होने चली गयी
मैं करीब 20 मिनट के बाद बाहर आयी तो देखा कि वो लोग मेरी देवरानी से काफी घुल मिल गयी हैं मुझे और भी डर लगने लगा कि कहीं उन्होंने मेरा राज़ तो नहीं खोल दिया
मैं उनसे बोली- चलें?
तो उन्होंने तुरंत उठ कर चलने की तैयारी कर ली मेरी देवरानी से विदाई लेकर वो लोग मुझे अपने साथ ले कर कार में बैठ गये
मैं जितना डर रही थी उतनी ही आसानी से सब कुछ हो गया रास्ते में मुझे बबीता ने बताया कि वो अपने पति के साथ आयी हुयी है
हम यूं ही बस एक दूसरे से जान पहचान करते हुये शहर पहुंच गये और ड्राईवर ने एक बड़े से होटल के सामने कार खड़ी कर दी
हम कार से निकले और ड्राईवर कार लेकर वहां से चला गया हम होटल में गये और लिफ्ट से पांचवें माले पर गये फिर हम तीनों वहां से एक कमरे की ओर बढ़े
तब मैंने पूछा- मेरे वो दोस्त और बबीता का पति कहां है?
इस पर शालू और बबीता हंसते हुये बोलीं- कमरे में चलो सब देख लेना खुद से
शालू ने अपने बैग से कमरे की चाभी निकाली और दरवाजा खोला उन्होंने अंदर जाते हुये मुझे भी अंदर आने को कहा और फिर दरवाजा अंदर से बंद कर दिया
कमरा क्या शानदार था चारों तरफ परदे और साज सजावट थी जैसे कि किसी फिल्म में होता है सामने सोफा और टेबल था और शायद बेडरूम अंदर था
मैं सोफे की तरफ बढ़ी पर वहां कोई दिखाई नहीं दे रहा था थोड़ा और आ गये गयी तो हल्की आवाज मेरे कानों में पड़ी जैसे कोई औरत कराह रही हो
मुझे एक पल के लिये तो ऐसा लगा कि शायद मेरे कान बज रहे हैं क्योंकि वासना का ही तो खेल खेलने मैं इनके साथ आयी थी
तभी एक लड़की के चिल्लाने की तेज़ आवाज आकर शांत हो गयी मैं सपाक से उनकी तरफ देखते हुये पूछने लगी यहां और कौन है?
वो दोनों मुस्कुराते हुये मुझे अंदर चलने को बोलीं और कहा खुद देख लो
अंदर जाते ही जो नज़ारा मैंने देखा उसे देख कर तो मेरे जैसे होश ही उड़ गये उम्म्म आह्ह्ह हाय याह
मैं दरवाजे के सामने ही खड़ी थी और वो नजारा मुझे सुधबुध खोने पर विवश कर रहा था अंदर मैंने देखा के बिस्तर पर दो मर्द हैं
जिसमें से एक पीठ के बल लेटा हुआ नज़ारा देख रहा था और दूसरा भी नंगा लेटा हुआ अपने लंड को हाथ से सहला रहा था उनके पास में एक बहुत गोरी औरत थी
जिसके भरे भरे मम्में और उठे हुये चूतड़ थे वो भी एकदम नंगी टांगें फैला कर पीठ के बल लेटी हुयी थी
उसके ऊपर एक 50-55 साल का आदमी उसकी टांगों को पकड़े हुये हवा में झुलाते हुये अपने लंड को उसकी चूत में तेज़ी से धकेलता हुआ अंदर बाहर कर रहा था इतना देख कर अभी मैं हैरान ही थी कि शालू ने मेरा हाथ पकड़ अंदर खींचा
मैंने दो कदम आगे बढ़ाये ही थे कि मेरी बाई ओर मैंने देखा कि एक औरत चेयर पर आगे की तरफ नंगी हो कर झुकी हुयी है और पीछे वो मेरा दोस्त उसके मम्मों को दबोचे हुये उसके चूत में लंड घुसा कर धक्के दे रहा था
मैं जब बाहर से अंदर आ रही थी तो कराहने सिसकने और हांफने की आवाज उम्म्म आह्ह्ह ओह्ह्ह हाय याह बढ़ती जा रही थीं और जब अंदर आयी तो ऐसा माहौल था कि पूरा कमरा उन दोनों औरतों की कराहों से गूंज रहा था
मुझे देखते ही मेरे उस पुराने मित्र ने धक्के लगाने छोड़ दिये और वो मेरी तरफ आ गये तभी वहां बिस्तर पर लेटा हुआ आदमी खड़ा होकर उस औरत के पास चला गया लेकिन उस औरत ने उसे मना किया और कहा पहले इन सबसे मिल तो लेने दो
मुझे आयी देख कर वे लोग भी जो बिस्तर पर संभोग कर रहे थे वो भी अलग हो गये और सब लोग बैठ कर मेरी ओर देखने लगे
मैं तो शर्म से पानी पानी हुयी जा रही थी साथ ही ये नज़ारे देख कर घबराने के साथ साथ कुछ दंग भी थी मेरे सामने 4 नंगे मर्द और दो नंगी औरतें थीं हम तीनों बबिता शालू और मैं ही बस कपड़ों में थे
तब मेरे उस मित्र ने कहा- शालू और बबिता से तो आप मिल ही चुकी हो इन से मिलो ये रामावतार जी हैं
बबिता के पति रामावतार वो थे जो नंगी औरत के साथ बिस्तर पर संभोग कर रहे थे वो जो लेटा हुआ था और बिस्तर पर जो औरत संभोग कर रही थी उनके बारे में बताया गया
ये विनोद और अमृता हैं पति पत्नी हैं फिर वो जो मेरे मित्र के हटने के बाद उठ कर खड़े हुये थे वो कांतिलाल जी थे और जिसके साथ मेरा मित्र खुद संभोग कर रहा था वो रमाबेन जी थीं मतलब कांतिलाल की पत्नी थीं
रामावतार और बबिता कानपुर से आए थे कांतिलाल और रमा जी गुजरात से और विनोद और अमृता कनाडा में रहते थे वे कनाडा से छुट्टियों में यहां आए थे
ये सब व्यस्क दोस्तों को खोजने की साईट से ही मिले थे अब इन सभी से मुझे भी मिलवा दिया गया था सबसे जान पहचान होने के बाद मैंने थोड़ी राहत की सांस ली क्योंकि उनकी सोच बड़े खुले विचारों की थी
उनकी सोच जानकर ऐसा लगा जैसे ये भारतीय नहीं बल्कि कोई विदेशी लोग हों विनोद और अमृता तो खैर हिंदी कम अंग्रजी ज्यादा ही बोलते थे सबके अपने अपने परिवार और बच्चे थे सिवाए शालू के क्योंकि वो शादीशुदा नहीं थी
शालू ही अकेली हम में सबसे कम उम्र की थी बाकी हम सब 45 के ऊपर ही थे बबिता 40 की थी रामजी 43 अमृता 46 की शालू 32 की और मैं 47 की विनोद 50 रामावतार जी 48 कांतिलाल भी 50 के थे
मैंने ऐसा पहली बार नजारा देखा कि नंगे होकर कुछ लोग मुझे अपना परिचय दे रहे हैं मेरा ध्यान तो बस इस पर था कि अब आगे क्या होगा उनकी बातों से तो ऐसा लग रहा था जैसे उनके लिये ये सब आम बात थी
पर मेरे लिये ये सब नया था इन सबसे मुझे तारा की उन सारी बातों पर यकीन हो चला था जिसमें उसने अलग अलग लोगों के साथ सामूहिक संभोग की बात कही थी
मैं ये सब सोच ही रही थी कि तभी मेरे पीछे से कांतिलाल जी ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरा पल्लू नीचे गिरा दिया मैं तुरंत पीछे घूमी तो वो मुझे देख कर मुस्कुरा रहे थे
मैंने पलट कर अपना पल्लू वापस उठाने का प्रयास किया तो मेरे पुराने वाले मित्र ने मेरा हाथ पकड़ कहा इन खूबसूरत मम्मों को क्यों छुपा रही हो?
बाकी कहानी hindi sex story के अगले भाग में
Antarvasna Sex Stories :- काम वासना की आग- 6