मां और बेटे की जरूरत – 1

हैलो दोस्तों मैं आपको अपनी मां बेटे की सेक्स स्टोरी बताने जा रही हूं जब एक ही छत के नीचे अवैध रिश्ते पनपते हैं तो उन्हें या तो अंत तक निभाना पड़ता है या फिर उनका अंत अच्छा नहीं होता ऐसा ही कुछ मेरे और मेरे बेटे के बीच पनप गया अब मैं अपनी mom hindi sex story शुरू करती हूं

Mom Hindi Sex Story 1

मैं विधवा हो गई थी और मेरे बेटे की बीवी की भी मौत हो गई थी मैं संजय की मां थी मेरे और संजय के बीच में लड़ाई हो जाती थी मैं जब उसको शादी करने के लिये कहती थी पर मेरा बेटा मेरी बहुत इज्जत करता था

संजय पुलिस में था अगर वो जिंदा होते तो संजय की शादी करा देते संजय मेरी बात तो सुनता नहीं मेरे पति यानि संजय के पापा हैं नहीं अब संजय को कौन समझाये की उम्र 30 साल की थी मेरी चाहत थी की मैं अपने बेटे की दूसरी शादी करूं पर वो हमेशा ना कर देता था

एक रात धीरे से उसके कमरे के बाहर करीब 11 बजे गई और खिड़की से जो देखा तो मेरा दिल धक धक करने लगा संजय गोल तकिये का सहारा लेकर बैठा हुआ था उसके बाएं एक किताब खुली हुई थी

उसका तना हुआ लंड देख कर मैं हैरान हो गई कि क्या संजय का हथियार इतना बड़ा हो सकता है उसने दायीं मुट्ठी में लंड पकड़ रखा था और धीरे धीरे मुठ मार रहा था मैं भी काम उत्तेजित हो उठी

फिर मुझे शरम आ गई और मैं वापिस अपने कमरे में आकर संजय के बारे में सोचने लगी मेरी नींद उड़ गई थी सुबह जब वो ऑफिस चला गया मैंने उसके बिस्तर के नीचे एक मैगजीन देखी जिसमे कई सुन्दर औरतें अपने गोपनीय अंगों को मसल रही थी

तो क्या मेरा बेटा रात को औरतों के निजी अंगों को देखता था मैंने मैगजीन उठा ली और अपने कमरे में ले आई फिर मैं बिस्तर पर लेट कर शुरू से देखने लगी उसमें ऐसे ऐसे सीन थे कि मुझे एक तंदरुस्त मर्द की जरुरत महसूस होने लगी

साथ ही मेरा सिर शर्म से झुक गया की मेरा जवान बेटा इतनी कामुक सोच रखता है उसमे हर उम्र के मर्द और औरतें सम्भोगरत थे लड़कियां अधेड़ मर्दो से अपने कोमल जिस्म को रौंदने दे रही थी कई पिक्स में लड़कियों के गुप्तांग से सफेद गाढ़ा वीर्य बाहर आ रहा था

मैं भी कल्पनाओं में खो गई की काश कोई मर्द मेरे गुप्तांग को भी अपने बड़े लंड से थरथरा देता पर इस उम्र में मैं यह बात किसी से भी नहीं कह सकती थी कई पिक्स में जवान लड़के अधेड़ महिलाओं के जिस्म को रौंद रहे थे

मैं इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और ड्रैसिंग टेबल के सामने खड़ी हो गई मैं शीशे के सामने अपने गोरे बदन को घूमा घूमा कर देखने लगी मैंने लगभग 2 हफ्ते पहले अपनी जांघों के बीच से बाल साफ करे मेरे गुप्तांग में जबरदस्त सुलसुलाहट होने लगी

तभी मेरे नीचे से 4-5 बूंद टपक पड़ी मैंने छटपटाते हुये अपनी दायीं जांघ उठा कर इस आस में टेबल पर रख दी की कोई जवान मर्द मेरे गुप्तांग की आग को अपनी मोटी कड़क बड़ी इन्द्री से बुझा दे और तब तक पेलता रहे जब तक मेरी पेशाब ना निकल जाये

मुझे उन अधेड़ महिलाओं से जलन महसूस हो रही थी जो जवान लड़कों के लंड से अपने गुप्तांग को बजवा रही थी तभी मेरे दिमाग में एक शैतानी आईडिया आ गया की संजय भी तो औरत के बिना तड़फ रहा है

मैंने सोचा क्यों ना मैं भी घर में ही अपने गोपनीय तरीके से संजय को उत्तेजित करके उसकी कड़क जवानी का आनन्द उठाऊं ? मैंने वो किताब छिपा कर रख दी ताकि संजय को पता चल जाये कि मां को पता चल गया है

शाम को संजय आया और उसने किताब ढूंढी होगी दो दिन तक वो थोड़ा परेशान रहा कि किताब कहां गई लेकिन तीसरे दिन उसके जाने के बाद किताब का वो पेज जिसमें एक अधेड़ महिला को डॉगी स्टाइल में खुश कर रहा था

मैंने थोड़ा सा मोड़ दिया और फिर से उसी जगह रख दी अगले दिन वो अजीब सी नजरों से मुझे घूर रहा था अगले दिन सुबह मुझे उसी जगह वो किताब मिली और उसका वो पेज मुड़ा हुआ था जिसमें एक अधेड़ महिला एक जवान लड़के का लंड चूस रही थी

संजय बहुत सेक्सी था मैं उसकी इच्छा समझ गई मैंने उस दिन वैसे ही वो किताब रख दी लेकिन अगले दिन मुझे उसमे एक गुलाब का ताजा फूल मिला जिसे मैंने निकाल लिया और शाम को उसमें चमेली का सफेद फूल रख दिया मैंने उसका प्यार स्वीकार कर लिया था

लेकिन अगले दिन जब वो ऑफिस चला गया तो उसमें एक मैनफोर्स का कंडोम रखा हुआ मिला मैं थोड़ी सी असहज हो गई क्योंकि संजय मेरी असलियत जान चुका था और इसीलिये उसने कंडोम रख दिया था

मैंने सोचा कि क्यों ना इस कहानी को यहीं ख़त्म कर दूं पर फिर कंडोम देख कर मेरा बदन अंगड़ाईयां लेने लगा और मैंने कैंची से उसका मुंह काटकर कंडोम थोड़ा सा बाहर निकाल दिया हम दोनों ने इस तरह अपनी अपनी इच्छा बता दी थी

अगले दिन सुबह उस किताब में मुझे एक छोटा सा कागज का टुकड़ा मिला जिसे खोलते हुये मेरा दिल धक धक करने लगा उसमे लिखा हुआ था कि क्या ये काम पूरा हो जायेगा जो मैं सोच रहा हूं

मैंने बिना देरी करे उसके नीचे लिख दिया हां पर प्यासे को कुएं के पास आना पड़ेगा ये लिख कर मैंने कागज वैसे ही मोड़ कर रख दिया शाम को हम टेबल पर एक साथ खाने बैठे तो हम दोनों की नगहें झुकी हुई थी पर दिल धड़क रहे थे

अगले दिन सुबह फिर मुझे नया परचा मिला जिसमे लिखा था रात में कितने बजे ? मैंने लिखा दिया रात को 11 के बाद फिर रात मैं संजय का इंतजार करती रही और इस उम्मीद में मैंने अपना पेटीकोट दाएं जांघ से उठाकर करवट ले कर सो गई

लेकिन संजय नहीं आया और मैं कामवासना में सारी रात तड़फती रही अगले दिन मुझे फिर बिस्तर के नीचे नया कागज मिला कि दिन में हम कैसे मिलेंगे ? मैंने लिख दिया की नहीं दिन में नहीं सिर्फ रात को दिन में हमारे संबंध वही रहेंगे जो हैं

उसने उसी कागज पर लिखा कि कहीं मैं गलत तो नहीं समझ रहा ? मैंने लिखा नहीं ताली दोनों हाथों से बजती है और आज रात प्यासे की प्यास बुझ सकती है पर कुएं का मुंह थोड़ा टाइट है किसी ने भी उसमें से अपनी प्यास नहीं बुझा सकी कुंआ अच्छी मरम्मत मांग रहा है

अगले दिन किताब तो मिली पर उसमे कुछ भी नहीं लिखा था फिर मैंने और पेज देखे तो एक कागज मिला लिखा हुआ था कि ठेकेदार पूरे एरिया का मुवायना करना चाहे तो ? क्योंकि कुंआ कहां है देखना पड़ेगा ना

मैंने लिख दिया कुंआ दो पहाड़ों के बीच में घिरा है थोड़ा कोशिश करोगे तो ढूंढ लोगे और हां नींबू भी हैं पर उनमें रस नहीं है उसने लिखा कुंआ तो ज्यादा तर तलहटी में ही रहता है

पर ऐसा तो नहीं होगा ना कि एन वक़्त पर कुएं की मालकिन कुएं को ढक दे और मरम्मत के दौरान अगर ठेकेदार का कुछ सामान वहां छूट गया तो ? उसके जवाब में मैंने लिखा कि वो सामान उसके कुएं में 9 महीने तक सुरक्षित रहेगा और फिर वापिस मिल जायेगा

तो अगले दिन लिखा हुआ मिला मरम्मत तो ऐसी हो जायेगी कि कुएं के मालिक ने भी नहीं की होगी ऐसी कभी और हां साथ में आस पास की भी तबियत से मरम्मत हो जाएगी ठेकेदार का हथियार देख लिया था ना ?

संजय को आभास था कि मैंने उसका हथियार देख लिया था संजय मेरे दोनों छेदों का मज़ा लेने को बेताब था मैंने कागज के टुकड़े में लिख दिया कि हां देख लिया था तभी तो कुंआ मरम्मत मांग रहा है

लेकिन कब होगी कुएं की मरम्मत ? बस फिर जो मैसेज मिला उससे मुझे थरथराहट सी महसूस हुई क्योंकि संजय का लंड मैंने देख लिया था उसका लंड सीधा और बिना नसों वाला दिख रहा था

वो जवान लड़का था और मेरे साथ पता नहीं शनिवार की रात को कैसे मेरे बदन से खेलने वाला था ? मैं उन कल्पनाओं में खो गई थी जब मैं सीत्कार करूं और वो अपने लंड से मुझे चोद रहा हो

अगले दिन किताब में हुआ था कि कुएं की मरम्मत शनिवार की रात होगी और तसल्ली से होगी कुएं को अंधेरा पसंद है या फिर डिम लाइट ? आज शुक्रवार था इसलिये मैंने दिल पर पत्थर रख लिया

मैंने शनिवार की सुबह कागज पर लिख दिया की कुएं को अंधेरा पसंद है क्योंकि मैं और वो दोनों मां बेटा थे और मैं शरमाना नहीं चाहती थी उसका तो पता था कि वो शराब पीकर ही मेरी लेगा

मुझे डर लगने लगा क्योंकि संजय बहुत दिनों से प्यासा था और उसका हथियार भी काफी बड़ा था 7 से साढ़े 7 इंच लम्बा था और करीब सवा दो इंच मोटा शनिवार को दिन में मेरे फोन पर एक अंजान नंबर से मिसकॉल आई मैंने कॉल पिक की तो कोई जवाब नहीं मिला

फिर कुछ देर बाद मैसेज आया कि अच्छी तरह आराम कर लेना क्योंकि आज कुएं की मरम्मत होनी है कुएं की खुदायी और मरम्मत देर तक चलेगी क्योंकि कुंआ काफी पुराना है

तब मेरे दिमाग की घंटी बजी कि ये संजय का ही मैसेज हो सकता है मैं इतनी खुश हुई कि कमरे में चटकनी मार कर मैंने अपने हिप्स देखे और अपनी चूत का दाना छुआ मेरी रातें फिर से रंगीन होने वाली थी

मैं शाम को ठीक 7 बजे नहाई और मैंने अपनी ब्रा नहीं पहनी काले रंग का पेटीकोट पहना और लाल रंग की साड़ी मैंने खाना पौने नौ बजे खा लिया था और संजय के लिये टेबल पर लगा दिया

बरसात के दिन थे रात मैं काफी देर तक उसका इंतजार करती रही मैंने कमरे के पल्ले बंद कर दिए फिर पता नहीं मुझे कब नींद आ गई कमरे में पंखा काफी तेज चल रहा था मैं दायीं करवट लेटी हुई थी

तभी मुझे लगा कि कोई मेरे बिस्तर पर आकर मेरे पीछे लेट गया है वो संजय के सिवा और कोई नहीं था मैं सीधी लेती हुई थी मुझे अपनी सांसों में शराब की गंध आई शायद वो मेरे चेहरे के बहुत करीब था और फिर मैंने अपने होंठों पर बहुत धीरे से चुम्बन महसूस किया

मेरा बेटा मुझे चूम रहा था मेरे तन बदन में काम वासना भड़कने लगी मैं बिलकुल अनजान बन कर लेटी हुई थी मुझे करीब ६ साल से काम सुख नहीं मिला था एक बार मेरा मन हुआ की मैं उसके हाथ पकड़ कर उसके एक चांटा मारूं

लेकिन फिर मैंने सोचा की ये जवान तगड़ा लड़का है और काम वासना में जल रहा है यह अपनी प्यास तो मेरे बदन से बुझा ही लेगा अगर उसके बाद मैं इसे झिड़कूंगी तो यह घर छोड़ कर जा सकता है इस कमजोरी ने मेरे हाथ बांध दिए

मेरी हालत ऐसी थी की मुझे भी मर्द की जरुरत महसूस हो रही थी जो बात मैं अपने बेटे से कभी ना कह सकी वो ही इच्छा मेरा बेटा पूरी करने वाला था फिर मैंने महसूस किया की वो मेरे ब्लाउज का ऊपरी बटन खोलने में लगा था और तभी उसने अंदर हाथ डाल कर मेरी दायीं चूची धीरे से मसल दी

शायद वो भी इस बात को समझ रहा था की मैं सोने का नाटक कर रही थी बस इसके बाद तो मेरी पेशाब की जगह गीली हो गई और मेरा मन हुआ कि संजय आज सारे बंधन तोड़ कर मुझे अपनी बांहों में जकड ले और हम दोनों बेखबर होकर मस्ती में डूब जाये

मेरे निप्पल तन चुके थे और मेरी चूत में जबरदस्त सुलसुलाहट होने लगी मेरा मन बस अब उसकी मर्दानगी देखने और महसूस करने के लिये तड़फ रहा था मैं अपने बेटे का मजबूत लंड अपने हाथ और मुंह में लेकर चूसना चाहती थी

पर मैं बेहद मजबूर थी की कहीं वो शर्म के मारे कमरे से ना चला जाये और मैं उस रात प्यासा नहीं रहना चाहती थी मेरा बेटा संजय भी करीब 2 साल से बिना औरत के रह रहा था मुझे कहीं ना कहीं ये लगा की उसकी गुनहगार मैं हूं शारीरिक पूर्ति उसका अधिकार था

तभी मुझे महसूस हुआ कि वो बैड पर ही अपना अंडरविअर उतार रहा है मेरा सारा जिस्म मदहोशी से थरथराने लगा मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा पेटीकोट जांघों तक उठ चुका है मेरा मन हो रहा था कि मैं अपनी दोनों जाँघें फैला कर संजय को मदहोश कर दूं

संजय बहुत धीरे धीरे मेरा पेटीकोट हटा रहा था शायद वो भी इतने नजदीक आकर प्यासा नहीं रहना चाहता था उसने बहुत धीरे से मेरी दोनों जांघों को बारी बारी से चौड़ा कर दिया उसके हाथ अब मेरी जांघों की गोलाई टटोल रहे थे

मेरी जांघों के बीच में उन दिनों छोटे छोटे बाल थे तभी मुझे उसकी उंगलियां उन बालों में चलती हुई महसूस हुई मैंने अंधेरे में बहुत देखने कोशिश की कि देखूं उसके चेहरे पर कैसे भाव हैं ?

तभी मैंने अपनी चूत पर उसकी बेहद गर्म साँसे महसूस की और शायद इसके बाद वो मेरी जांघों के बीच में उकड़ू बैठ गया क्योंकि मैंने अपने गुप्तांग पर उसके सिर के बाल महसूस किये शायद वो मेरी चूत को चाटना चाहता था

उसने 3-4 बार कोशिश की पर कामयाब नहीं हुआ मेरा मन हो रहा था की क्यों नहीं संजय मेरे चूतड़ों को अपने हाथों में लेकर मेरी चूत को चाट लेता मैं उसे कैसे ये सब कहती ?

एक बार तो मेरा जी हुआ कि मैं बकरी की तरह झुक जाऊं और संजय मेरे गुप्तांग को चाटे जैसे अक्सर बकरे या सांड चाटते हैं और ऐसा चटवाने से पुरुषों का पुरुषत्व जागता है और महिलाएं चरम सुख पा सकती हैं

पर अक्सर औरतें शरम के मारे चुप रहती हैं मुझे तो इसलिये पता था कि मैं गाँव में रहती थी और हमारे घर में जानवर थे और कई बार मैंने सांड को गाय की पूंछ के नीचे चाटते देखा था और गाय गौंत दिया करती थी

तब सांड़ हम सब बच्चों को दौड़ता था और गाय की कमर पर अगले दोनों पैर टिका कर उसकी चूत को रगड़ता था बस मेरे मन में भी यही कामुक ख्याल आने लगा कि काश संजय मुझे उल्टा करके चोदता

तभी मैंने महसूस किया कि मेरे मम्मों पर किसी के हाथ हैं वो हाथ मेरे मम्में धीरे धीरे दबा रहा था मेरी नींद खुली हुई पर मैं सोने का नाटक करती रही मुझे बहुत अच्छी फीलिंग आ रही थी

कमरे में इस रात को संजय के आलावा कौन हो सकता था रात के करीब साढ़े ग्यारह होंगे कमरे में घुप्प अंधेरा था उसके इस तरह मेरी छातियां दबाने से मुझे बहुत अच्छा लग रहा था अक्सर रात में ज्यादा गर्मी होने के कारण साड़ी उतार दिया करती थी

इसलिये मैंने अपनी लाल साड़ी उतार कर बिस्तर पर ही फेंक दी थी क्योंकि तेज रंग से मर्द ज्यादा कामुक हो जाते हैं वो मेरा पेटीकोट धीरे धीरे ऊपर सरका रहा था मेरी दायीं जांघ आगे की तरफ मुड़ी हुई थी और मैंने बाई जांघ सीधी फैला रखी थी

मेरा पेटीकोट कूल्हों तक ऊपर उठ चूका था तभी मैंने अपनी जांघ पर उसकी हथेली का हल्का स्पर्श महसूस किया मेरे रोम रोम मैं मस्ती सी छाने लगी

उसकी गरम हथेली मेरी जांघों के जोड़ की तरफ फिसल रही थी मुझे पक्का यकीन था कि आज की रात संजय मेरी 5 साल से अनछुई चूत को सहलायेगा और तभी उसकी उंगलियां मेरी चूत के मांसल हिस्से को टोहने लगी

मैंने रेजर से करीब 20 दिन पहले झांटे साफ करी थी इसलिये मेरी झांटे करकरी थी मैं स्लिम बदन की थी मेरे नितम्बों यानि चूत्तडों का साइज 38 इंच था उसकी उंगलियों की छुवन मेरी कामवासना को भड़का रही थी

इस बात को वो ही नारी समझ सकती है जो कई सालों से मर्द की बांहों में ना सोयी हो और मेरा वो ही हाल था संजय की उंगलियां मेरी चूत की दरार में मचल रही थी वो मेरी चूत की कटान की लम्बाई का अन्दाजा लगा रहा था

इतने घुप्प अंधेरे में भी उसने मेरा दाना ढूँढ लिया था उसे जैसे ही उसने अंगूठे और एक ऊँगली के बीच में पकड़ा मेरा मन हुआ कि मैं संजय की हथेली में पेशाब कर दूं उसने मेरा दाना अंगुली के पोर से सहलाना शुरू कर दिया

मेरा दाना फूलने लग गया उत्तेजना के मारे मेरे दोनों छेद सिकुड़ने लग गये और फिर उसने मेरी चूत के होंठ टटोलने शुरू करे पर उसे निराशा हुई होगी क्योंकि उसके पापा मेरी बुर यानि चूत के होंठ बाहर नहीं निकाल सके थे

कहते हैं कि लड़की शादी के बाद कली से खिल कर फूल बन जाती है पर मै ना कली रह गई थी और ना ही फूल बन सकी उस वक़्त तो मैं उसकी मां ही थी तभी मुझे आभास हुआ की संजय के गुप्तांग से अजीब सी आवाज आ रही है

जो शायद उसके लंड की चमड़ी के टकराने से हो रही थी वो कामवेश में आकर हस्त मैथुन करने लगा था मैंने उसके पापा को कई बार ऐसे करते देखा था जब माहवारी के दिनों में मैं उन्हें अपने पास नहीं आने देती थी

तभी उसने मेरे दोनों पैर करीब ढाई फीट दूर फैला दिए मैंने उसके घुटने अपनी जांघों पर महसूस किये वो मेरी जांघों के बीच में बैठ चूका शायद उकड़ू था घबरा भी रहा था और तेज तेज धड़क रहा था

फिर उसने मेरे दोनों हाथ अपनी हथेलियों में फंसा लिये मैं बिलकुल बेसुध होने का नाटक कर रही थी संजय मेरे बदन पर छाता चला जा रहा था और तभी उसने मेरे होंठ अपने गरम होंठों में भींच लिये जब मैं समझ गई की वो अब इस मंजिल छोड़ने वाला नहीं था

इसलिये मैंने अपने को पाक साफ़ रखने के लिये धीरे से कहा संजय मुझे छोड़ो ये क्या कर रहे हो ? पर उसकी पकड़ और तेज हो गई थी मैं जन बुझ कर थोड़ा मचलने लगी पर उसने मुझे अपने नीचे लगभग दबा सा लिया था संजय की हाइट करीब 5 फ़ीट 7 इंच थी

मैं अपनी जाँघे भींचने बेकार सी कोशिश करने लगी उसने मेरी जाँघें अपने घुटनों से फिर से चौड़ी कर दी उसने मुझे अपने नीचे दबा कर मेरे स्तन मलने लगा मेरी जांघों के बीच में उसका गरम लंड टकरा रहा था

उसका लंड काफी भारी था वो मेरी चूत को अपने लंड से दबाने की कोशिश करने लगा मैंने उसे फिर कहा संजय जो तू करना चाह रहा है वो मैं तुझे करने नहीं दूंगी उसने मुझे कहा कि मां प्लीज मुझे करने दो ना

बाकी कहानी Maa Beta Sex Story के अगले भाग में

Maa Beta Sex Story :- मां और बेटे की जरूरत – 2

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